पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री Mohsin Naqvi शनिवार, 20 जून 2026 को तेहरान पहुंचे। उनका यह दौरा ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। इस दौरे का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया की प्रगति पर चर्चा करना है।
यह पूरी प्रक्रिया 18 जून को साइन हुए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर आधारित है, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। इस समझौते का मकसद युद्ध को रोकना और तनाव कम करना है। इसके तहत सभी मोर्चों पर सैन्य ऑपरेशन बंद करने और बल प्रयोग न करने का वादा किया गया है।
समझौते की मुख्य शर्तें
इस समझौते में ईरान के लिए कई आर्थिक और सुरक्षा संबंधी प्रावधान शामिल हैं, जिन्हें नीचे दी गई टेबल में समझाया गया है:
| विवरण | समझौते की शर्त |
|---|---|
| पुनर्निर्माण फंड | ईरान के लिए 300 बिलियन डॉलर का फंड |
| आर्थिक राहत | पाबंदियों में छूट और फ्रीज की गई संपत्ति की वापसी |
| तेल निर्यात | ईरानी तेल निर्यात के लिए अमेरिका से तुरंत छूट |
| नौसैनिक नाकाबंदी | अमेरिका द्वारा 30 दिनों के भीतर नाकाबंदी पूरी तरह हटाना |
| हॉर्मुज जलडमरूमध्य | 60 दिनों तक जहाजों का मुफ्त और सुरक्षित रास्ता |
| समय सीमा | डील को फाइनल करने के लिए अधिकतम 60 दिन का समय |
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने साफ किया कि बातचीत तभी शुरू होगी जब MoU की शर्तों को लागू किया जाएगा। वहीं, विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने इस डिजिटल समझौते का उल्लंघन किया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
इस बीच एक बड़ी खबर यह भी आई कि 19 जून को इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में युद्धविराम हो गया। ईरान के लिए यह एक बड़ी शर्त थी और अब इस कदम के बाद अमेरिका और ईरान के दूत स्विट्जरलैंड में फिर से मुलाकात की तैयारी कर रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस समझौते का समर्थन किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 60 दिनों के भीतर अंतिम डील हो जाएगी, लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसके नतीजे भुगतने होंगे। दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ, तो वे और भी सख्त सैन्य जवाब देंगे।