पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसराइल की सैन्य कार्रवाई पर बहुत सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जब शांति के लिए बातचीत चल रही है, तब इसराइल लेबनान में नरसंहार कर रहा है। पाकिस्तान की सरकार ने साफ किया है कि इस तरह के हमलों से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो रही है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई है और शांति प्रयासों को लेकर संशय पैदा हो गया है।

लेबनान में जारी हमलों पर पाकिस्तान का रुख

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय ने लेबनान की स्थिति पर अपनी चिंता जाहिर की है। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर कुछ महत्वपूर्ण बातें कही हैं जो इस प्रकार हैं:

  • इसराइल के हमलों में अब तक सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं और करीब 5 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।
  • प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने लेबनान के प्रधानमंत्री से बात कर उन्हें पाकिस्तान के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया है।
  • पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इसराइल को मानवता के लिए एक बड़ा श्राप और बुराई करार दिया है।
  • इसराइल का दावा है कि उसके हमले केवल हिजबुल्लाह के ठिकानों तक सीमित हैं, लेकिन पाकिस्तान इसे आम लोगों का कत्लेआम मान रहा है।

शांति वार्ता और सीजफायर पर पैदा हुआ नया विवाद

पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और इस्लामाबाद में बातचीत की तैयारी चल रही है। हालांकि, सीजफायर के दायरे को लेकर अलग-अलग देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं जिसे नीचे दी गई टेबल से समझा जा सकता है:

पक्ष सीजफायर पर विचार
पाकिस्तान और ईरान लेबनान सहित सभी क्षेत्रों में तुरंत युद्धविराम होना चाहिए।
इसराइल और अमेरिका लेबनान को इस विशेष सीजफायर समझौते में शामिल नहीं किया गया है।
ईरान के राष्ट्रपति लेबनान पर बमबारी जारी रहने तक बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।

ईरान का कहना है कि लेबनान पर हो रहे हमले शांति की कोशिशों को जानबूझकर कमजोर करने के लिए किए जा रहे हैं। पाकिस्तान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर इस तरह की सैन्य कार्रवाई जारी रही, तो डिप्लोमैटिक बातचीत सफल होना मुश्किल होगा।