पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। फैसलाबाद और कराची में लोगों ने सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छोटी बच्चियों का अपहरण कर उनकी जबरन शादी कराई जा रही है और उनका धर्म बदला जा रहा है।

प्रदर्शनों में क्या मांगें की गईं और क्यों हुआ बवाल

11 अप्रैल 2026 को फैसलाबाद में Catholic Diocese के बिशप Andreas Rehmat के नेतृत्व में “Justice for Minority Girls” नाम से एक मार्च निकाला गया। इसमें नाबालिग लड़कियों के अपहरण और उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसी नाबालिग लड़की को पत्नी नहीं माना जा सकता और धर्म परिवर्तन जबरन नहीं होना चाहिए।

इससे पहले 31 मार्च 2026 को कराची प्रेस क्लब के बाहर भी ईसाई संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। यह प्रदर्शन “Maria case” में कोर्ट के एक फैसले के बाद हुआ, जिसने अल्पसंख्यक समुदाय के बीच डर और असुरक्षा बढ़ा दी।

सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का क्या कहना है

मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना मंत्री Attaullah Tarar ने 5 अप्रैल 2026 को एक सरकारी कमेटी बनाई। यह कमेटी 13 साल की Maria Shahbaz की 30 साल के व्यक्ति से हुई शादी को सही ठहराने वाले कोर्ट के फैसले की समीक्षा करेगी। वहीं UK के All-Party Parliamentary Group (APPG) ने भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण और जबरन शादी के पैटर्न पर गहरी चिंता जताई।

UN विशेषज्ञों ने 11 अप्रैल 2024 को एक बयान जारी किया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों को सुरक्षा नहीं मिल रही है और वे तस्करी, यौन हिंसा और जबरन शादी के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। UN ने मांग की कि दोषियों को सजा मिले और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों का पालन हो।

कानूनी स्थिति और बिशप के बयान

बिशप Samson Shukardin ने सरकारी कमेटियों पर संदेह जताया और कहा कि ऐसी कमेटियां अक्सर तब तक समय खींचती हैं जब तक मामला चर्चा से बाहर न हो जाए। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा बताया। पाकिस्तान के संविधान का Article 20 और Article 35 सभी नागरिकों को धर्म और परिवार की सुरक्षा का अधिकार देते हैं।

महत्वपूर्ण कानून और निकाय विवरण
Pakistan Minorities Rights Commission Act 2016 अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया कानून
National Commission for Minorities Bill 2025 दिसंबर 2025 में पास हुआ, लेकिन जांच शक्तियों की कमी पर विवाद है
National Commission for Human Rights (NCHR) मानवाधिकारों की निगरानी करने वाली सरकारी संस्था
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.