Saudi Arabia Visit: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहुंचे जेद्दा, सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Muhammad Shehbaz Sharif अपने तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर 6 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के Jeddah पहुंच गए हैं। उनका यह दौरा 8 अगस्त 2026 तक चलेगा, जिसे सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री Mohammed bin Salman bin Abdulaziz Al Saud के निमंत्रण पर आयोजित किया गया है। प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह महत्वपूर्ण दौरा दोनों देशों के बीच पुराने और मजबूत रिश्तों को नई दिशा देने के लिए है।
भव्य स्वागत और प्रतिनिधिमंडल
King Abdulaziz International Airport पर पहुंचने पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का स्वागत मक्का क्षेत्र के डिप्टी गवर्नर Prince Saud bin Mishaal bin Abdulaziz ने किया। इस दौरान सऊदी अरब के पर्यावरण, जल और कृषि मंत्री Abdulrahman bin Abdulmohsen Al-Fadley और सऊदी अरब में पाकिस्तान के राजदूत Ahmad Farooq भी वहां मौजूद रहे। प्रधानमंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Muhammad Ishaq Dar, थल सेना प्रमुख Field Marshal Syed Asim Munir, रक्षा मंत्री Khawaja Asif और सूचना मंत्री Attaullah Tarar शामिल हैं।
चर्चा के मुख्य केंद्र
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय (MoFA) के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस दौरे का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता Tahir Hussain Andrabi ने बताया कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर विस्तार से बातचीत होगी। इस दौरान मिडिल ईस्ट की वर्तमान स्थिति, खास तौर पर गाजा, फिलिस्तीनी क्षेत्रों, रेड सी और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
धार्मिक यात्रा का कार्यक्रम
अपनी आधिकारिक बैठकों के अलावा, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपनी इस यात्रा के दौरान धार्मिक रस्में भी पूरी करेंगे। वे मक्का में Umrah अदा करेंगे और इसके बाद मदीना जाकर पैगंबर मोहम्मद साहब (PBUH) की मस्जिद, Masjid-e-Nabawi में हाजिरी देंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच न केवल कूटनीतिक बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को भी और गहरा करने का एक जरिया है। सऊदी अरब में रहने वाले लाखों पाकिस्तानी प्रवासियों और पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए इस तरह की उच्च स्तरीय बातचीत को काफी अहम माना जा रहा है।