पाकिस्तान में मीडिया और पत्रकारों के लिए हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, वहां सेंसरशिप और सरकारी दबाव इतना बढ़ गया है कि पत्रकारों को अब छोटी-छोटी ख़बरों के लिए भी बहुत संभलकर काम करना पड़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में अब प्रेस की आज़ादी पुराने दौर के सैन्य शासन से भी ज़्यादा सिमट गई है। पत्रकारों को न केवल कानूनी मामलों में उलझाया जा रहा है, बल्कि उन पर आर्थिक दबाव भी डाला जा रहा है ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम न कर सकें।

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पाकिस्तान में पत्रकारों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है?

पत्रकारों को अपनी रिपोर्टिंग के कारण गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में एक एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने 8 पत्रकारों और यूट्यूबर्स को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। उन पर 2023 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान डिजिटल गतिविधियों के माध्यम से समर्थन करने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा, कराची प्रेस क्लब ने भी खोजी पत्रकारों के खिलाफ दर्ज किए जा रहे मुकदमों की कड़ी निंदा की है। वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि अब रिपोर्टिंग का दायरा इतना छोटा हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को भी सरकार के निर्देशानुसार ही कवर करना पड़ता है।

मीडिया की आज़ादी को रोकने के लिए कौन से तरीके अपनाए जा रहे हैं?

सरकार और संबंधित एजेंसियां न्यूज़ चैनलों और अखबारों को नियंत्रित करने के लिए कई तरह के कानूनी और आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल कर रही हैं। नीचे दी गई टेबल में उन प्रमुख तरीकों को देखा जा सकता है जिनका उपयोग मीडिया की आवाज़ दबाने के लिए किया जा रहा है:

तरीका असर
कानूनी कार्रवाई PECA जैसे कानूनों के तहत पत्रकारों पर केस दर्ज कर जेल भेजना।
आर्थिक दबाव सरकारी विज्ञापनों को रोकना और बैंक खातों को फ्रीज़ करना।
यात्रा प्रतिबंध पत्रकारों के नाम एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ECL) में डालकर विदेश जाने से रोकना।
सेंसरशिप टीवी चैनलों के प्रसारण को रोकना और न्यूज़ क्लिप्स को हटाना।

सरकार और मानवाधिकार संस्थाओं का क्या पक्ष है?

पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री प्रेस की आज़ादी को लोकतंत्र के लिए ज़रूरी तो बताते हैं, लेकिन साथ ही वे ‘जिम्मेदार पत्रकारिता’ और ‘राष्ट्रीय हित’ का हवाला देकर नियमों को सख्त बनाने की बात भी करते हैं। गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने साफ़ तौर पर चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया और यूट्यूब पर सरकार के खिलाफ बोलने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। दूसरी ओर, ह्यूमन राइट्स वॉच और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स जैसी संस्थाओं ने पाकिस्तान की रैंकिंग गिरने पर गहरी चिंता जताई है। साल 2025 के प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 180 देशों में से 158वें स्थान पर पहुंच गया है, जो बताता है कि वहां हालात कितने गंभीर हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com