पाकिस्तान के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की भारी कमी से इलाज की स्थिति गंभीर हो गई है। इस्लामाबाद और खैबर पख्तूनख्वा के बड़े अस्पतालों में आईसीयू पूरी तरह से भर चुके हैं, जिससे जरूरतमंद मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हाल ही में पीआईएमएस (PIMS) अस्पताल में पत्रकार Abid Raza Kazmi की वेंटिलेटर न मिलने के कारण मृत्यु होने से स्थिति की भयावहता सामने आई है।

वेंटिलेटर की कमी और बढ़ती मांग

पीआईएमएस के कार्यकारी निदेशक Dr. Rana Imran Sikander ने बताया कि अस्पताल में 90 से अधिक वेंटिलेटर होने के बाद भी वे हमेशा फुल रहते हैं, क्योंकि न्यूरोलॉजी और पल्मोनोलॉजी के मरीजों को लंबे समय तक मशीन पर रहना पड़ता है। वहीं, पॉलीक्लीनिक अस्पताल के प्रवक्ता Dr. Abdul Jabbar Bhutto के अनुसार, उनके यहाँ उपलब्ध सभी 35 वेंटिलेटर लगातार व्यस्त रहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ मशीन बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि स्टाफ की भारी कमी भी इलाज में बड़ी बाधा है। निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च 3 लाख रुपये प्रति दिन तक पहुंच गया है, जिसे वहन करना आम आदमी के लिए बेहद मुश्किल है।

सरकार के प्रयास

सरकार की ओर से पीआईएमएस में एक नया ब्लॉक बनाया जा रहा है, जिसमें 40 नए वेंटिलेटर जोड़े जाएंगे। ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान (DRAP) ने स्थानीय स्तर पर निर्मित वेंटिलेटर ‘AlnnoVent’ और ‘Innovent’ को मंजूरी दी है ताकि तकनीक के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य ढांचे में सुधार और तकनीकी क्षमता को बढ़ाना समय की बड़ी मांग है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com