पाकिस्तान के रावलपिंडी में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बड़े संकट में घिर गई हैं। यहां के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों पर दवाइयां और अन्य मेडिकल सामान सप्लाई करने वाली कंपनियों का लगभग 2.2 अरब रुपये का भारी कर्ज चढ़ गया है। इस बड़े कर्ज के कारण अब गरीब मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवाइयों की सुविधा बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। पंजाब सरकार की आधिकारिक नीति के अनुसार आपातकालीन विभागों और ओपीडी में मरीजों को मुफ्त दवाएं दी जानी चाहिए, लेकिन बजट न होने से यह योजना पूरी तरह चरमरा गई है।

रावलपिंडी के तीन बड़े अस्पतालों पर कितना है कर्ज?

रावलपिंडी के तीन सबसे प्रमुख अस्पतालों में दवाइयों की भारी कमी हो गई है क्योंकि फार्मास्युटिकल सप्लायर्स ने अब उधार पर सामान देना बंद कर दिया है। होली फैमिली हॉस्पिटल (HFH), बेनजीर भुट्टो जनरल हॉस्पिटल (BBGH) और रावलपिंडी टीचिंग हॉस्पिटल (RTH) इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन अस्पतालों को जितना बजट चाहिए था, सरकार ने उसका एक छोटा हिस्सा ही मंजूर किया है।

अस्पताल का नाम कुल बकाया कर्ज (PKR) मांगा गया बजट (PKR) मिला हुआ बजट (PKR)
होली फैमिली हॉस्पिटल (HFH) 90 करोड़ रुपये 1.5 अरब रुपये 40 करोड़ रुपये
बेनजीर भुट्टो जनरल हॉस्पिटल (BBGH) 85 करोड़ रुपये 1.5 अरब रुपये 38 करोड़ रुपये
रावलपिंडी टीचिंग हॉस्पिटल (RTH) 27 करोड़ रुपये 80 करोड़ रुपये 23 करोड़ रुपये

फंड की कमी और सरकार की बेरुखी से बढ़ा संकट

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बजट की कमी के कारण यह गंभीर स्थिति पैदा हुई है। होली फैमिली हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एजाज बट ने बताया कि अस्पताल को दवाओं के लिए 90 करोड़ रुपये के बड़े घाटे का सामना करना पड़ रहा है। मई 2026 के आखिरी हफ्ते में पंजाब सरकार ने केवल 13 करोड़ रुपये का फंड जारी किया था, जिसमें से होली फैमिली हॉस्पिटल को 6 करोड़ रुपये, बेनजीर भुट्टो हॉस्पिटल को 5 करोड़ रुपये और रावलपिंडी टीचिंग हॉस्पिटल को केवल 2 करोड़ रुपये मिले। यह राशि इतने बड़े कर्ज को चुकाने और नई दवाएं खरीदने के लिए बहुत कम है। इस पूरे मामले को लेकर पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ख्वाजा सलमान रफीक को भी अवगत कराया गया है।

हर दिन 10,000 से ज्यादा मरीजों पर पड़ रहा है असर

इन तीन अस्पतालों में मिलाकर कुल 2,580 बेड की क्षमता है और रोजाना ओपीडी और इमरजेंसी में 10,000 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। मुफ्त दवाएं न मिलने की वजह से गरीब मरीजों को बाहर की दुकानों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। रावलपिंडी मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत फंड जारी नहीं किया गया तो मुफ्त दवा योजना पूरी तरह बंद हो जाएगी, जिससे आम जनता के बीच भारी गुस्सा पैदा हो सकता है। सप्लायर्स अब बिना पुराना भुगतान किए नए ऑर्डर लेने को तैयार नहीं हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

रावलपिंडी के अस्पतालों पर कुल कितना कर्ज बकाया है?

रावलपिंडी के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों पर दवा और मेडिकल सप्लायर्स का लगभग 2.2 अरब रुपये का कर्ज बकाया है।

क्या मरीजों को अभी मुफ्त दवाएं मिल रही हैं?

फंड की भारी कमी और सप्लायर्स द्वारा उधार पर दवा देने से मना करने के कारण मुफ्त दवा योजना बंद होने की कगार पर है और मरीजों को परेशानी हो रही है।

पंजाब सरकार ने हाल ही में कितना फंड जारी किया है?

पंजाब सरकार ने मई 2026 के अंत में दवा खरीद के लिए केवल 13 करोड़ रुपये जारी किए थे, जो अस्पतालों के कुल कर्ज के मुकाबले बेहद कम है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.