पाकिस्तान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस निर्देश को साफ तौर पर खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कई मुस्लिम देशों को अब्राहम समझौते (Abraham Accords) पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा था। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने साफ कर दिया है कि देश किसी भी ऐसे समझौते का समर्थन नहीं करेगा जो उसकी बुनियादी विचारधारा के खिलाफ हो। पाकिस्तान ने अपना रुख स्पष्ट रखा है कि जब तक यरूशलेम राजधानी के साथ एक स्वतंत्र और व्यावहारिक फिलिस्तीनी राज्य का गठन नहीं हो जाता, तब तक वह इसराइल के साथ संबंध सामान्य नहीं करेगा।

पाकिस्तान के मंत्रियों और अधिकारियों ने क्या कहा?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान दबाव में आकर अपने राष्ट्रीय हितों और विचारधारा से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने इसराइल के साथ किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। इसके साथ ही विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी साफ किया कि अब्राहम समझौते में शामिल होने का मतलब देश के लंबे समय से चले आ रहे टू-स्टेट सॉल्यूशन के समर्थन को खत्म करना होगा, जो पाकिस्तान को मंजूर नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भी इस बात को दोहराया कि इसराइल को मान्यता देने के लिए फिलिस्तीन का स्वतंत्र होना पहली और आखिरी शर्त है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन से दूसरे देश इस समझौते में शामिल हो रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या मांग रखी थी?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे मुस्लिम देशों को अब्राहम समझौते में शामिल होने के लिए कहा था। ट्रंप का मानना था कि ईरान के साथ किसी भी समझौते को ऐतिहासिक बनाने के लिए इन देशों का इस समझौते पर हस्ताक्षर करना जरूरी होना चाहिए।

पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से नकार दिया है। पाकिस्तान का रुख साल 1948 से ही स्पष्ट रहा है। पाकिस्तान के पासपोर्ट पर भी साफ शब्दों में लिखा होता है कि यह यात्रा दस्तावेज इसराइल के लिए मान्य नहीं है, जो इसकी गैर-मान्यता की नीति को दिखाता है। विशेषज्ञ सैयद मोहम्मद अली ने भी कहा कि ट्रंप के नए प्रस्ताव के बावजूद पाकिस्तान का पुराना रुख पूरी तरह से कायम है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या पाकिस्तान अब्राहम समझौते का हिस्सा बनेगा?

नहीं, पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते में शामिल नहीं होगा। देश का रुख है कि वह तब तक इसराइल को मान्यता नहीं देगा जब तक यरूशलेम राजधानी के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य नहीं बन जाता।

डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर क्या मांग रखी थी?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान शांति समझौते के तहत पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों के लिए अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा था।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.