पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को एक बड़ी खबर साझा की। उन्होंने बताया कि उनके देश ने 3.5 अरब डॉलर का अनिवार्य कर्ज सफलतापूर्वक चुका दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि सऊदी अरब के अहम सहयोग की वजह से मुमकिन हो पाई। उन्होंने किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का इस मदद के लिए आभार व्यक्त किया।
सऊदी अरब ने पाकिस्तान की आर्थिक मदद कैसे की?
सऊदी अरब ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कुल 8 अरब डॉलर की वित्तीय मदद का ऐलान किया था। इसमें पहले से मौजूद 5 अरब डॉलर की जमा राशि को बढ़ाना और 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त मदद देना शामिल था। सऊदी वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी इस समझौते की पुष्टि की। पाकिस्तान को यह पैसा किस्तों में मिला जिससे उसे अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने में मदद मिली।
| तारीख | विवरण | रकम |
|---|---|---|
| 15 अप्रैल 2026 | सऊदी अरब से मिली पहली किस्त | 2 अरब डॉलर |
| 16 अप्रैल 2026 | कुल वित्तीय सहायता का ऐलान | 8 अरब डॉलर |
| 23 अप्रैल 2026 | सऊदी अरब से मिली दूसरी किस्त | 1 अरब डॉलर |
| 24 अप्रैल 2026 | UAE को कर्ज का भुगतान | 3.45 अरब डॉलर |
| 29 अप्रैल 2026 | कुल कर्ज भुगतान की घोषणा | 3.5 अरब डॉलर |
| विवरण | नई अतिरिक्त जमा राशि | 3 अरब डॉलर |
| विवरण | पुरानी जमा राशि का विस्तार | 5 अरब डॉलर |
कर्ज भुगतान के बाद पाकिस्तान की स्थिति क्या है?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भरोसा दिलाया कि इतनी बड़ी रकम चुकाने के बाद भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि इससे बाजार में पाकिस्तान के प्रति भरोसा और मजबूत हुआ है। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने भी बताया कि पिछले हफ्ते 1.4 अरब डॉलर का बाहरी भुगतान किया गया था और 1.4 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड का भुगतान भी आसानी से पूरा हो गया। पाकिस्तान फिलहाल 7 अरब डॉलर के IMF प्रोग्राम के लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है जिसमें सऊदी अरब और UAE जैसे देशों की जमा राशि बनाए रखना जरूरी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पाकिस्तान ने कितना कर्ज चुकाया और किसकी मदद ली
पाकिस्तान ने 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाया है। इस काम में सऊदी अरब ने वित्तीय सहायता प्रदान कर पाकिस्तान की मदद की।
क्या कर्ज चुकाने से पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार कम हुआ
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार इस भुगतान से विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिरता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा बल्कि मार्केट कॉन्फिडेंस बढ़ा है।