पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सरकारी प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सिंध सरकार इस साल गेहूं खरीदने के अपने तय लक्ष्य को पूरा करने में बुरी तरह नाकाम रही है, जिससे पूरे राज्य में आटे की भारी किल्लत हो गई है। सरकारी गोदामों में गेहूं न होने का फायदा अब बाजार के बड़े कारोबारी और जमाखोर उठा रहे हैं। खुले बाजार में गेहूं की कीमतें अचानक 25 फीसदी तक बढ़ गई हैं, जिसके कारण आम जनता को बहुत महंगे दामों पर आटा खरीदना पड़ रहा है।
सिंध में क्यों हुआ आटे का संकट और क्या हैं ताजा दाम?
सिंध सरकार ने इस सीजन में 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन प्रशासन केवल 79,835.66 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीद पाया। यह कुल लक्ष्य का 8 प्रतिशत भी नहीं है। इस बड़ी नाकामी के कारण खुले बाजार में गेहूं और आटे के दाम आसमान छू रहे हैं। कराची और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में हालात बहुत खराब हो चुके हैं।
नीचे दी गई तालिका में आप देख सकते हैं कि सरकार के फेल होने के बाद कीमतों में कितना अंतर आया है:
| क्षेत्र और वस्तु | बाजार में वर्तमान दाम | सरकारी तय दर |
|---|---|---|
| कराची में गेहूं (प्रति 100 किलोग्राम) | PKR 11,100 | PKR 8,750 |
| हैदराबाद में गेहूं (प्रति 100 किलोग्राम) | PKR 10,900 | PKR 8,750 |
| खुदरा आटा (प्रति किलोग्राम) | PKR 135 से PKR 140 | PKR 107 |
सरकारी खरीद फेल होने की क्या रही मुख्य वजह?
कृषि विभाग के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक सिंध में इस साल 48 लाख टन गेहूं की बंपर पैदावार हुई थी। इसके बावजूद सरकारी खरीद फेल हो गई क्योंकि सरकार ने अपनी खरीद प्रक्रिया बहुत देरी से शुरू की। इस देरी का फायदा उठाकर निजी खरीदारों और जमाखोरों ने किसानों से सरकारी समर्थन मूल्य (3,500 रुपये प्रति 40 किलोग्राम) से अधिक कीमत पर गेहूं खरीद लिया। इसके अलावा, पिछले साल दिसंबर 2025 में भी खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर प्रति बोरी 1,000 से 1,200 रुपये की रिश्वत मांगे जाने के मामले सामने आए थे, जिससे मिल मालिकों ने सरकारी गेहूं उठाने से मना कर दिया था।
सरकार और मंत्रियों ने इस पर क्या एक्शन लिया?
सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने गेहूं की बढ़ती कीमतों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और कीमतों के अंतर को कम करने के लिए एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। वहीं, सिंध के खाद्य मंत्री मखदूम महबूब उज जमां ने खाद्य विभाग और जिला प्रशासनों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने वाले मुनाफाखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की बात कही है। दूसरी तरफ, संघीय मंत्री राणा तनवीर हुसैन ने भी चिंता जताई है कि सिंध सरकार की कम खरीद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर अनाज का संकट खड़ा हो सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सिंध में सरकारी गेहूं की खरीद इतनी कम क्यों हुई?
सरकार ने अपनी खरीद प्रक्रिया बहुत देर से शुरू की, जिसके कारण किसानों ने अपना गेहूं सरकारी रेट से अधिक कीमत पर निजी खरीदारों को बेच दिया। इस वजह से सरकार अपने 10 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 79,835.66 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीद सकी।
वर्तमान में सिंध में आटा किस रेट पर बिक रहा है?
खुले बाजार में आटे की खुदरा कीमत बढ़कर 135 रुपये से 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि सरकार द्वारा अधिसूचित रियायती दर केवल 107 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई थी।
