पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने पंजाब प्रांत के अलग-अलग शहरों से 11 सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर राज्य के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैलाने और अशांति भड़काने का गंभीर आरोप लगा है। यह पूरी कार्रवाई गुरुवार, 28 मई 2026 को छापेमारी के बाद की गई है। इस कार्रवाई के बाद से देश में अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।
सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स पर क्यों हुई यह कार्रवाई?
पकड़े गए लोगों पर आरोप है कि वे इंटरनेट पर राज्य विरोधी अभियान चला रहे थे और सरकारी संस्थाओं, खास तौर पर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ भड़काऊ बातें लिख रहे थे। वे लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थे। NCCIA पंजाब के डायरेक्टर मोहम्मद अली वसीम ने बताया कि जनता में डर और अस्थिरता फैलाने वाले लोगों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। उन्होंने साफ किया कि इस तरह के तत्वों के खिलाफ यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
किस कानून के तहत हुई गिरफ्तारी और क्या हैं नियम?
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों पर प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA), 2016 के तहत केस दर्ज किया गया है। यह कानून मूल रूप से साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाया गया था। हालांकि, एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी मानवाधिकार संस्थाओं ने इस कानून के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। संस्था का कहना है कि पाकिस्तान में ऑनलाइन बोलने की आजादी और आतंकवाद विरोधी कानूनों में बदलाव से आम लोगों, पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स को निशाना बनाया जा रहा है।
जांच में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
NCCIA पंजाब के प्रवक्ता के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों के डिजिटल डिवाइस, मोबाइल और सोशल मीडिया रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है। इसका मकसद उनके पूरे नेटवर्क का पता लगाना और यह देखना है कि वे किसके इशारे पर काम कर रहे थे। गौरतलब है कि इससे पहले मई 2026 की शुरुआत में भी पुलिस ने पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे ही 13 सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पाकिस्तान में सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को क्यों गिरफ्तार किया गया है?
इन लोगों को इंटरनेट पर राज्य विरोधी प्रचार करने, अशांति फैलाने और सेना जैसी सरकारी संस्थाओं के खिलाफ भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
इन कार्यकर्ताओं पर किस कानून के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है?
गिरफ्तार किए गए सभी लोगों पर प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA), 2016 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।