पाकिस्तान में शहरों का तेजी से बढ़ना अब वहां के लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। खेतों की जगह अब कंक्रीट के घर और दुकानें ले रहे हैं, जिससे आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों की भारी कमी होने का डर है। हाल ही में फैसलाबाद में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बड़े जानकारों और पॉलिसी बनाने वालों ने इस गंभीर खतरे की चेतावनी दी है।

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शहरों का विस्तार और खेती पर असर

फैसलाबाद की University of Agriculture (UAF) में माइग्रेशन और लेबर अफेयर्स पर एक कॉन्फ्रेंस हुई। इस दौरान पंजाब Higher Education Commission के चेयरमैन डॉ. इकरार अहमद खान ने बताया कि लोग तेजी से शहरों की तरफ जा रहे हैं। इस वजह से उपजाऊ जमीन पर हाउसिंग स्कीमें और कमर्शियल बिल्डिंग्स बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या अब सिर्फ सामाजिक नहीं रही, बल्कि यह आर्थिक और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा बन गई है। पूर्व MD WASA राशिद अहमद ने भी बताया कि हरे-भरे खेतों को कंक्रीट की कॉलोनियों में बदलने से पानी की कमी और फूड सिक्योरिटी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

पाकिस्तान सरकार का प्लान और सहायता

इस संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने कुछ खास कदम उठाए हैं। Ministry of Planning Development & Special Initiatives ने साल 2030 तक फूड सिक्योरिटी में 7% का सुधार लाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही ‘5Es National Economic Transformation Plan (2024-2029)’ पर काम किया जा रहा है ताकि गरीबी और भूख को कम किया जा सके। गरीबों की मदद के लिए Benazir Income Support Program (BISP) चलाया जा रहा है, जिसके जरिए हर साल 1 करोड़ गरीब परिवारों को नकद पैसे दिए जाते हैं और 30 लाख माताओं और नवजात बच्चों को पोषण सहायता दी जा रही है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान में फूड संकट क्यों बढ़ रहा है?

शहरों का अनियंत्रित विस्तार होने और उपजाऊ खेतों को रिहायशी कॉलोनियों में बदलने की वजह से खेती की जमीन कम हो रही है, जिससे खाने की कमी का खतरा बढ़ गया है।

सरकार ने भूख मिटाने के लिए क्या लक्ष्य रखे हैं?

सरकार ने 2030 तक फूड सिक्योरिटी में 7% सुधार लाने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए 5Es नेशनल इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन प्लान लागू किया है।