अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है और दोनों देशों ने एक-दूसरे पर बड़े हमले किए हैं। इस बीच पाकिस्तान ने दोनों देशों से अपील की है कि वे पुराने समझौते का पालन करें और ऐसी कोई हरकत न करें जिससे इलाके की शांति खत्म हो जाए। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 8 जुलाई 2026 को यह बयान जारी किया है।
तनाव तब बढ़ा जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने 8 जुलाई 2026 को अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के Fifth Fleet मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया। जवाब में अमेरिकी मिलिट्री के सेंट्रल कमांड ने भी ईरान के 80 से ज़्यादा ठिकानों पर हमले किए।
क्या था इस्लामाबाद समझौता
इरान और अमेरिका के बीच 17 जून 2026 को एक समझौता हुआ था जिसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) कहा गया। यह समझौता फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए किया गया था। इसमें 14 मुख्य बातें थीं, जिसमें आपसी सम्मान और ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने की बात कही गई थी। इस समझौते के तहत दोनों देशों को स्थायी शांति समझौते के लिए 60 दिन का समय दिया गया था।
इस समझौते को कराने में पाकिस्तान ने बड़ी भूमिका निभाई थी और अप्रैल 2026 में संघर्ष विराम भी करवाया था। लेकिन यह समझौता 8 जुलाई 2026 को खत्म हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी दिन साफ कह दिया कि ईरान के साथ यह अंतरिम डील अब खत्म हो चुकी है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की नई जंग किसी के भी हित में नहीं है और पाकिस्तान बीच-बचाव करने के लिए अब भी तैयार है।
