पाकिस्तान आज ईरान से एक अहम जवाब का इंतज़ार कर रहा है। खबर है कि शांति समझौते की पूरी ज़िम्मेदारी अब ईरान के कंधों पर है। पाकिस्तान पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच पुल का काम कर रहा है ताकि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सके और कोई ठोस नतीजा निकल सके।

ईरान से जवाब का इंतज़ार और पाकिस्तान की भूमिका

CNN की रिपोर्ट और @SaudiNews50 के मुताबिक, 1 मई 2026 को पाकिस्तान को ईरान से एक संशोधित प्रस्ताव मिलने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने 15 अप्रैल 2026 को बताया था कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए इकलौता मध्यस्थ बनकर उभरा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने भी इस भूमिका पर खुशी जताई थी और कहा था कि देश को यह मौका मिलने पर गर्व है।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या चल रहा है

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 29 अप्रैल को कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन यह सिर्फ फ़ोन के ज़रिए हो रही है। उन्होंने साफ़ किया कि कोई भी समझौता तभी होगा जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी लगाने को तैयार होगा। इससे पहले 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आमने-सामने बातचीत हुई थी, लेकिन उस वक्त कोई नतीजा नहीं निकला और बातचीत टूट गई थी।

क्या ईरान को पाकिस्तान पर भरोसा है

ईरान में कुछ लोगों को पाकिस्तान की निष्पक्षता पर शक है। ईरानी lawmaker Ibrahim Reszay ने 28 अप्रैल को कहा कि पाकिस्तान अक्सर अमेरिका के हितों के साथ चलता है, इसलिए वह एक अच्छा मध्यस्थ नहीं है। इसी वजह से ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने रूस और ओमान जैसे देशों से संपर्क बढ़ाया है और रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin से भी मुलाकात की है ताकि दूसरे रास्ते तलाशे जा सकें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच क्या भूमिका निभा रहा है

पाकिस्तान दोनों देशों के बीच एक मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर काम कर रहा है ताकि उनके बीच शांति समझौता हो सके और तनाव कम हो।

अमेरिका की ईरान के लिए मुख्य शर्त क्या है

राष्ट्रपति Donald Trump के अनुसार, कोई भी समझौता तभी संभव है जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए तैयार हो।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.