पाकिस्तान में इस समय सिंचाई के पानी की भारी कमी के कारण गंभीर कृषि संकट खड़ा हो गया है। सुक्कुर बैराज (Sukkur Barrage) के राइट बैंक कैनल सिस्टम में पानी की भारी किल्लत से सिंध और बलूचिस्तान में लाखों एकड़ खरीफ की फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। सिंध सरकार ने इसे अपना बड़ा आर्थिक नुकसान बताया है और इस पूरे मामले को लेकर देश में राजनीतिक बहस और तनाव काफी बढ़ गया है।
पानी के बंटवारे को लेकर क्यों शुरू हुआ मुख्य विवाद?
सिंध सरकार का आरोप है कि इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) साल 1991 के ऐतिहासिक जल समझौते के नियमों का ठीक से पालन नहीं कर रही है। सिंध के वरिष्ठ मंत्री शरजील इनाम मेमन ने इस मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि पानी की लगातार कमी से सिंध में खेती को भारी नुकसान हो रहा है और इसका असर कराची शहर में पीने के पानी की सप्लाई पर भी पड़ रहा है। पीपीपी सिंध के अध्यक्ष निसार अहमद खुहरो ने इस स्थिति को सिंध के किसानों के साथ एक बड़ा आर्थिक अन्याय बताया है, क्योंकि सिंध देश के कुल कृषि उत्पादन में 67 प्रतिशत का योगदान देता है।
आंकड़ों में समझिए पानी की भारी कमी की पूरी स्थिति
सिंध के सिंचाई विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, पानी की कमी का स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। पंजाब प्रांत पर आरोप है कि वह ऊपरी इलाकों से अपने तय कोटे से अधिक पानी निकाल रहा है, जिससे निचले इलाकों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस पूरी स्थिति को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| नहर या बैराज का नाम | वर्तमान स्थिति और आंकड़े |
|---|---|
| नॉर्थ वेस्ट कैनल (North West Canal) | पानी की आपूर्ति में 64.1% की भारी कमी आई है |
| राइस कैनल (Rice Canal) | सामान्य से 38.0% पानी कम मिल रहा है |
| दादू कैनल (Dadu Canal) | पानी की सप्लाई में 82.0% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है |
| पंजाब द्वारा पानी की निकासी | आवंटित 44,000 क्यूसेक के मुकाबले 53,394 क्यूसेक पानी निकाला जा रहा है (21.35% अधिक) |
| तौंसा बैराज (Taunsa Barrage) | आवंटित 24,000 क्यूसेक के मुकाबले 25,694 क्यूसेक पानी निकाला जा रहा है (9.3% अधिक) |
| सिंध की कुल मांग बनाम आपूर्ति | सिंध की मांग 130,000 क्यूसेक की है, लेकिन केवल 100,000 क्यूसेक पानी ही मिल रहा है |
किसानों की खेती और जमीनी हालात पर क्या असर पड़ा?
पूर्व अध्यक्ष इशाक मुघेरी ने चेतावनी दी है कि पानी की कमी के कारण सिंध और बलूचिस्तान के बीच ग्रांग रेगुलेटर से पानी के बंटवारे को लेकर नया विवाद शुरू हो सकता है। शहदादकोट और कुबो सईद खान जैसे इलाकों में नहरों के अधूरे काम और पानी की भारी किल्लत के कारण किसान अपने सीजन की बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं। चाशमा बैराज में पानी का स्तर शुक्रवार के 644.9 फीट से बढ़कर शनिवार को 646.4 फीट हो गया, जिससे साफ पता चलता है कि ऊपरी इलाकों में पानी जमा हो रहा है जबकि निचले इलाकों के किसान सूखे से जूझ रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इस जल संकट से पाकिस्तान के कौन से राज्य सबसे अधिक प्रभावित हैं?
इस गंभीर संकट से सबसे अधिक नुकसान सिंध और बलूचिस्तान प्रांत को हो रहा है, जहां सिंचाई के लिए पानी न मिलने से खरीफ की फसलों पर खतरा मंडरा रहा है।
सिंध सरकार ने पंजाब प्रांत पर क्या आरोप लगाए हैं?
सिंध सरकार का आरोप है कि पंजाब ऊपरी इलाकों से अपने तय कोटे 44,000 क्यूसेक की जगह 53,394 क्यूसेक पानी ले रहा है, जो करीब 21.35% अधिक है।
सिंध को अपनी मांग के अनुसार कितना पानी मिल रहा है?
सिंध ने सिंचाई के लिए 130,000 क्यूसेक पानी की मांग रखी है, लेकिन उन्हें केवल 100,000 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है, जिससे बड़ी कमी पैदा हो गई है।
