पाकिस्‍तान के दफ्तरों में बदसलूकी और उत्पीड़न के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में कुल 1,290 शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें अब केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में पुरुष भी अपनी आवाज़ उठा रहे हैं।

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Federal Ombudsperson for Protection against Harassment (FOSPAH) के रिकॉर्ड के मुताबिक, इन 1,290 शिकायतों में से 769 शिकायतें महिलाओं ने दर्ज कराईं, जबकि 521 शिकायतें पुरुषों की थीं। इसका मतलब है कि कुल मामलों में करीब 40% शिकायतें पुरुषों ने की हैं। विभाग ने इन मामलों में से 1,104 शिकायतों का निपटारा भी कर दिया है।

किस शहर में कितनी शिकायतें

सबसे ज़्यादा मामले इस्लामाबाद में सामने आए हैं। यहाँ पुरुषों की 231 और महिलाओं की 496 शिकायतें दर्ज हुईं। इसके बाद पंजाब का नंबर आता है, जहाँ पुरुषों ने 222 और महिलाओं ने 154 शिकायतें कीं। अन्य शहरों की बात करें तो पेशावर में 42, कराची में 24 और बलूचिस्तान में 2 मामले दर्ज हुए। अधिकारियों का कहना है कि इस्लामाबाद में मामले ज़्यादा इसलिए हैं क्योंकि वहां लोगों को कानूनी अधिकारों की जानकारी ज़्यादा है।

शिकायतों में भारी उछाल

Federal Ombudsperson Fauzia Viqar के नेतृत्व में मार्च 2023 से अब तक कुल 3,078 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से 2,736 का निपटारा हो चुका है। साल 2024 में शिकायतों की संख्या में 375% की भारी बढ़ोत्तरी देखी गई। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि अब लोग FOSPAH पर भरोसा कर रहे हैं और अपनी समस्या बताने के लिए आगे आ रहे हैं।

बचाव के लिए नए कदम और ऐप

सरकार ने उत्पीड़न रोकने के लिए कई नई पहल शुरू की हैं:

  • Hum Badlen Ge Soch: यह अभियान नवंबर 2025 में शुरू किया गया ताकि समाज की सोच को बदला जा सके।
  • My Sentry App: दिसंबर 2024 में एक ऐप लॉन्च किया गया जो दफ्तरों में सुरक्षा और शिकायत दर्ज करने में मदद करता है।
  • Becky’s Button: महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक पोर्टेबल पैनिक अलार्म बनाया गया है।
  • मेट्रो बस कैंपेन: इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और मुल्तान की मेट्रो बसों और स्टेशनों पर जागरूकता स्टीकर लगाए गए हैं।

नया कानून क्या कहता है

14 जनवरी 2022 को लागू हुए “Protection against Harassment of Women at the Workplace (Amendment) Bill, 2022” ने सुरक्षा के दायरे को बढ़ा दिया है। अब इस कानून में केवल बड़े दफ्तर ही नहीं, बल्कि घर में काम करने वाले (domestic workers), छात्र और ट्रांसजेंडर व्यक्ति भी शामिल हैं। इसमें लिंग के आधार पर होने वाले किसी भी भेदभाव को उत्पीड़न माना गया है और शिकायत करने वाले की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है।