गल्फ देशों से मार्च से जुलाई के बीच 21 हज़ार से ज़्यादा पाकिस्तानी नागरिक डिपोर्ट, सामने आई बड़ी वजह.

गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 21,951 पाकिस्तानी नागरिकों को खाड़ी देशों से वापस उनके वतन भेज दिया गया है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि यह कार्रवाई 1 मार्च से 13 जुलाई 2026 के बीच की गई है। मिनिस्ट्री फॉर नारकोटिक्स कंट्रोल की तरफ से अगस्त के आखिर में यह जानकारी साझा की गई थी, जिसमें बताया गया कि इन लोगों को इमीग्रेशन नियमों का उल्लंघन करने और आपराधिक मामलों में शामिल होने के कारण डिपोर्ट किया गया है।
सऊदी अरब से सबसे ज्यादा लोग भेजे गए वापस
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC देशों में सबसे ज्यादा डिपोर्टेशन सऊदी अरब की तरफ से किए गए हैं। अकेले सऊदी अरब से लगभग 15,500 पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा गया है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE से 3,803, ओमान से 1,606, बहरीन से 521, कतर से 429 और कुवैत से 97 लोगों को डिपोर्ट किया गया है। इन तमाम लोगों को वापस भेजने के पीछे कई तरह के कारण बताए गए हैं, जिनमें वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी रुकना, अवैध रूप से देश में घुसना, भीख मांगना, ड्रग्स से जुड़े मामले, फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करना, चोरी करना और सुरक्षा से जुड़े मामले शामिल हैं।
किन कारणों से हुई कार्रवाई
सरकार की तरफ से जो ब्योरा दिया गया है उसके मुताबिक 4,628 लोगों को भगाए गए या काम छोड़कर भागे हुए यानी absconders के तौर पर पकड़ा गया। इसके अलावा 1,294 ऐसे लोग थे जिन्होंने जेल की सजा काट ली थी, 968 लोगों को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, 1,155 लोग पासपोर्ट खोने के बाद डिपोर्ट हुए, 689 लोग वीजा नियमों को तोड़ने के चलते पकड़े गए और 342 ऐसे लोग थे जिन्हें देश में एंट्री नहीं मिली। वहीं बाकी के 6,662 मामलों को 'अन्य' यानी others कैटेगरी में रखा गया है। पार्लियामेंट्री अफेयर्स के मिनिस्टर डॉ. तारिक फजल चौधरी ने साफ किया कि इन आंकड़ों में सिर्फ उन्हीं लोगों को शामिल किया गया है जिन्हें इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट के जरिए कानूनी रूप से हिरासत में लेकर वापस भेजा गया है। जो लोग अपनी मर्जी से या वैध पासपोर्ट पर वापस आए हैं, उनका डेटा इसमें शामिल नहीं है। रिपोर्टों से यह भी पता चला है कि कुछ लोगों को क्षेत्रीय तनाव से जुड़े वीडियो बनाने या सोशल मीडिया पर अपलोड करने के कारण भी सुरक्षा कारणों से हिरासत में लिया गया था। इन तमाम घटनाक्रमों के बाद पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है और गल्फ देशों के अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है ताकि सभी को उचित कानूनी प्रक्रिया मिल सके। साथ ही अधिकारी प्रभावित नागरिकों की संपत्तियों और कारोबार से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रहे हैं ताकि इस अनिवार्य वापसी से होने वाले नुकसान को कुछ कम किया जा सके।