Palestine Envoy on E1 Plan: इसराइल की नई बस्ती योजना पर मचा बवाल, फिलिस्तीन के राजदूत ने बताया खतरनाक साजिश

फिलीस्तीन के दूत Ammar Hijazi ने इसराइल की E1 सेटलमेंट योजना को लेकर बड़ा बयान दिया है और इसे एक सोची-समझी नीति करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस प्रोजेक्ट के तहत 1,200 से ज्यादा नए घर बनाए जाने हैं, जिससे कब्जे वाले वेस्ट बैंक का इलाका दो हिस्सों में बंट सकता है। इससे भविष्य में बनने वाले फिलिस्तीनी देश के लिए जमीनी जुड़ाव खतरे में पड़ जाएगा। यह पूरा मामला इसराइली हाउसिंग मिनिस्ट्री के उस फैसले के बाद गरमाया है, जिसमें 21 अगस्त 2026 को E1 इलाके में 1,234 हाउसिंग यूनिट्स के लिए टेंडर खोलने की घोषणा की गई थी। पीस नाउ जैसे सेटलमेंट वॉचडॉग ने इस कदम को आगामी चुनावों से पहले एक सुनियोजित और तबाह करने वाली नीति बताया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद दुनिया भर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। 20 अगस्त 2026 को यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, कनाडा, नॉर्वे और यूरोपीय आयोग समेत कुल 16 देशों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस टेंडर को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। इसके बारे में विस्तार से जानकारी यूके सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है। इसके तुरंत बाद 21 अगस्त 2026 को आठ अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने भी कड़ी निंदा की। इन देशों में UAE, सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र शामिल हैं। इन सभी देशों ने मिलकर तुरंत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने और इस प्रोजेक्ट को रोकने की मांग की है। इस बाबत अधिक जानकारी WAM समाचार एजेंसी के माध्यम से साझा की गई है।
यूरोप और अमेरिका का रुख
इस विरोध प्रदर्शन में ऑस्ट्रिया के चांसलर Christian Stocker और विदेश मंत्री Beate Meinl-Reisinger भी शामिल हो गए। उन्होंने 23 अगस्त 2026 को साफ तौर पर दोहराया कि बस्तियों का यह विस्तार अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। दूसरी ओर, अमेरिका ने वेस्ट बैंक के विलय का विरोध तो किया है, लेकिन उसने सीधे तौर पर E1 प्लान की खुलकर आलोचना करने से दूरी बनाए रखी है। आने वाले समय में इस E1 प्रोजेक्ट के तहत कुल 3,400 से अधिक हाउसिंग यूनिट्स बनाए जाने की योजना है। यह मुद्दा कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ा विवाद बन गया है क्योंकि इससे पूर्वी यरूशलम के अलग-थलग पड़ने और टू-स्टेट थ्योरी के कमजोर होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।