Palestine में इसराइली Settlers का कहर जारी, Qusra Village के घरों पर 11 दिन से घेराबंदी.

वेस्ट बैंक के कुसराह गांव में इसराइली बस्तियों के लोगों यानी सेटलर्स की तरफ से बहुत बड़ा तनाव पैदा किया गया है। इसराइली सेना की सुरक्षा के बीच इन लोगों ने फलस्तीनी परिवारों के घरों को पिछले 11 दिनों से पूरी तरह से घेर रखा है। इस घटना की शुरुआत 9 अगस्त 2026 को हुई थी जिसके बाद से हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। इस नाकेबंदी की वजह से वहां फंसे हुए लोगों का जीना मुहाल हो गया है और उन्हें रोजमर्रा की बुनियादी चीजें तक नहीं मिल पा रही हैं।
घरों में कैद हुए परिवार और बच्चों की मुसीबत
इस घेराबंदी की वजह से रास अल-ऐन इलाके में बने तीन फलस्तीनी घरों के अंदर लगभग 15 फलस्तीनी नागरिक पूरी तरह से कैद होकर रह गए हैं। इन फंसे हुए लोगों में दो छोटी बच्चियां भी शामिल हैं जो बिना किसी खाने-पीने की चीज, दवाइयों और पानी के रहने को मजबूर हैं। हालांकि इसराइली सेना ने इस पूरे इलाके को बंद सैन्य क्षेत्र घोषित कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद सेटलर्स वहां बिल्कुल खुलेआम घूम रहे हैं। डराने और धमकाने के मकसद से उन लोगों ने एक घर के बाहर अपना तंबू तक गाड़ दिया है जिससे वहां रहने वाले परिवारों में भारी डर का माहौल है।
स्थानीय नेताओं और संयुक्त राष्ट्र की कड़ी प्रतिक्रिया
कुसराह गांव के मेयर अब्दुल अजीम वादी ने इस बात की जानकारी दी है कि आने-जाने पर लगी इन सख्त पाबंदियों की वजह से परिवारों की पढ़ाई लिखाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी तरह से बाधित हो गई हैं। जिन परिवारों को घेरा गया है उनमें अबू रिदा और हसन परिवार मुख्य रूप से शामिल हैं। अमेरिका के ओहियो से लौटकर अपनी जमीन बचाने वाले फलस्तीनी-अमेरिकी मकान मालिक लोई अबू रिदी ने बताया कि उन्होंने जेरूसलम स्थित अमेरिकी दूतावास से बात की थी। वहां के अधिकारियों ने उन्हें ओहियो के स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने को कहा ताकि इस मामले को अमेरिकी विदेश विभाग और व्हाइट हाउस तक पहुंचाया जा सके। इस मामले पर बोलते हुए इस्राइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने सार्वजनिक तौर पर इन सेटलर्स की कड़ी निंदा की है और उन्हें इसराइली आतंकवादी करार दिया है।
मानवाधिकार संगठनों की तीखी टिप्पणियां
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च कमिश्नर के कार्यालय यानी OHCHR ने इस नाकेबंदी को बहुत ही क्रूर और अमानवीय बताया है। उनका साफ कहना है कि इन हरकतों का एकमात्र मकसद उन परिवारों को जबरन उनकी अपनी जमीन से भगाना है। फलस्तीनी इलाकों में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के प्रमुख अजित सुंघाई ने कहा कि इसराइल डिफेंस फोर्सेज यानी IDF या तो फलस्तीनी समुदायों की रक्षा करने में पूरी तरह से असमर्थ है या फिर वे इन सेटलर्स के साथ पूरी तरह मिले हुए हैं। इसके अलावा एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस स्थिति को रणनीतिक आतंक करार दिया है और इसे राज्य समर्थित बस्तियों की हिंसा में भारी बढ़ोतरी का हिस्सा बताया है।
हमलों के आंकड़े और आगे के कदम
ACLED मिडिल ईस्ट के सहायक अनुसंधान प्रबंधक नासिर खदूर के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक केवल कुसराह गांव में ही सेटलर्स से जुड़ी 80 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। पूरे वेस्ट बैंक की बात की जाए तो इस साल इस तरह के हमलों का आंकड़ा लगभग 1500 तक पहुंच गया है। घिरे हुए परिवारों के वकीलों ने इन चल रही पाबंदियों के खिलाफ सैन्य अधिकारियों के पास औपचारिक याचिका दायर की है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी इस स्थिति का जायजा लेने के लिए जल्द ही इस गांव का दौरा करने की योजना बना रहा है। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी आप ReliefWeb रिपोर्ट में देख सकते हैं।