पंजाब-हरियाणा समेत पूरे भारत में सड़क हादसे पर 1.5 लाख का मुफ्त इलाज, मौत पर 2 लाख मुआवजा

GulfHindi Desk8 January 20264 min read1 viewsIndia

भारत सरकार ने सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों की जान बचाने और उनके परिवारों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार की नई पहल के तहत अब सड़क दुर्घटना के शिकार किसी भी व्यक्ति को इलाज के पैसों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार ने घायलों के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट की सुविधा शुरू की है, जिसके तहत 1.5 लाख रुपये तक का इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा। यह योजना न केवल घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करेगी, बल्कि दुर्घटना के बाद के सबसे नाजुक समय यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में उनकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाएगी।

सड़क हादसे के शिकार लोगों के लिए संजीवनी, अस्पताल में भर्ती होने के 7 दिनों तक मिलेगा 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा तैयार की गई इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी के कारण किसी की जान न जाए। नई ‘कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम 2025’ के तहत, दुर्घटना होने के बाद पहले 7 दिनों तक घायल व्यक्ति के इलाज का पूरा खर्च सरकार और बीमा कंपनियां उठाएंगी। इसमें सरकारी और पैनल में शामिल निजी अस्पताल दोनों शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि इस दौरान मरीज के पास कोई बीमा पॉलिसी हो या न हो, या मौके पर कोई दस्तावेज मौजूद न हो, फिर भी इलाज नहीं रोका जाएगा। इसमें इमरजेंसी केयर, सर्जरी, आईसीयू, सीटी स्कैन और दवाइयों का पूरा खर्च कवर किया जाएगा।

चंडीगढ़ और पंजाब समेत 6 राज्यों में सफल ट्रायल के बाद अब पूरे देश में लागू होगी योजना, ‘पीएम राहत’ नाम से होगी री-लॉन्च

इस महत्वाकांक्षी योजना को सीधे पूरे देश में लागू करने से पहले सरकार ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर परखा था। यह योजना चंडीगढ़, असम, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा और पुडुचेरी में पहले ही सफलतापूर्वक चलाई जा चुकी है। वहां मिले सकारात्मक परिणामों के बाद अब इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसे 5 मई 2025 से पूरे देश में प्रभावी बनाने की रूपरेखा तैयार की है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी 2026 में इसे आधिकारिक तौर पर ‘पीएम राहत’ (PM RAHAT) योजना के नाम से देश को समर्पित करेंगे, जिससे यह जन-जन तक पहुंच सके।

दुर्घटना में जान गंवाने पर पीड़ित परिवार को मिलेगी 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद, हिट-एंड-रन मामलों में भी बढ़ाई गई मुआवजे की रकम

सिर्फ इलाज ही नहीं, सरकार ने दुर्घटना में होने वाली जनहानि के लिए मुआवजे की राशि में भी भारी बढ़ोतरी की है। सड़क हादसे में मौत होने पर अब पीड़ित परिवार को 25,000 रुपये के बजाय 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। यह राशि परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए दी जाएगी। इसके अलावा, हिट-एंड-रन (जहाँ टक्कर मारने वाले वाहन का पता नहीं चलता) मामलों में भी सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई है। ऐसे मामलों में अब पीड़ितों को 12,500 रुपये के बजाय 50,000 रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी, ताकि मुश्किल वक्त में उन्हें सहारा मिल सके।

हादसे के तुरंत बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में किसी भी नजदीकी अस्पताल में ले जाने की सुविधा, दस्तावेजों के झंझट से मिली आजादी

इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के तुरंत बाद का एक घंटा) है। अक्सर देखा जाता है कि कानूनी पचड़ों या पैसे जमा कराने के दबाव में इलाज में देरी हो जाती है। नई व्यवस्था के तहत, हादसे के तुरंत बाद घायल को नजदीकी पैनल अस्पताल ले जाया जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन मरीज से पैसे मांगने के बजाय इलाज का बिल सीधे सरकार या संबंधित बीमा कंपनियों को भेजेगा। इससे इलाज शुरू करने में एक मिनट की भी देरी नहीं होगी और डॉक्टर तुरंत उपचार शुरू कर सकेंगे।

राजधानी दिल्ली में पहले से चल रही ‘फरिश्ते योजना’ बनी नजीर, निजी अस्पतालों में भी 72 घंटे तक इलाज देने की है कानूनी बाध्यता

राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना को लागू करने के पीछे दिल्ली सरकार की ‘फरिश्ते दिल्ली के’ योजना की सफलता भी एक बड़ा उदाहरण है। दिल्ली में पहले से ही यह नियम लागू है कि सड़क हादसे, आगजनी या एसिड अटैक के पीड़ितों का किसी भी निजी अस्पताल में कैशलेस इलाज किया जाएगा। दिल्ली की तर्ज पर ही अब केंद्र सरकार भी यह सुनिश्चित कर रही है कि सड़क हादसों में घायल लोगों को किसी भी राज्य में उपचार से वंचित न होना पड़े। दिल्ली में तो यहां तक नियम है कि अस्पताल इलाज से इनकार नहीं कर सकते और ऐसा करने पर उनका लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है।

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