Panama Canal Update: मिडिल ईस्ट तनाव से पनामा नहर में बढ़ी भीड़, कतार से बचने के लिए एक जहाज ने दिए 40 लाख डॉलर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने पूरी दुनिया के समुद्री व्यापार को हिला कर रख दिया है। इस वजह से अब जहाजों का रूट बदल गया है और पनामा नहर (Panama Canal) पर ट्रैफिक बहुत ज्यादा बढ़ गया है। हालात इतने खराब हैं कि लंबी कतारों से बचने के लिए कुछ जहाजों को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

पनामा नहर में क्यों बढ़ गई जहाजों की भीड़?

मिडिल ईस्ट में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट आई है। एशिया के देश अब खाड़ी देशों के बजाय संयुक्त राज्य अमेरिका से तेल और गैस खरीद रहे हैं, जिसे लाने के लिए जहाजों को पनामा नहर का रास्ता लेना पड़ रहा है। पनामा नहर प्राधिकरण (ACP) के मुताबिक, अब यहाँ रोजाना 36 से 38 जहाज गुजर रहे हैं। वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में कुल पारगमन में 3.7% की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें कुल 6,288 जहाज शामिल हैं।

जहाजों को कितना भारी पड़ रहा है यह रास्ता?

रास्ता बदलने और भारी भीड़ की वजह से नहर से गुजरने की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। एक LNG जहाज ने लंबी कतार से बचने और 5 दिन का समय बचाने के लिए करीब 40 लाख डॉलर का भुगतान किया। पहले जहाँ औसत नीलामी कीमत 1.3 लाख डॉलर थी, वह मार्च और अप्रैल में बढ़कर 3.85 लाख डॉलर तक पहुंच गई है। कुछ तेल टैंकरों ने तो इस रास्ते के लिए 30 लाख डॉलर से भी ज्यादा चुकाया है।

विवरण आंकड़े/कीमत
पुराना औसत नीलामी शुल्क 1.3 लाख डॉलर
नया औसत नीलामी शुल्क (मार्च-अप्रैल) 3.85 लाख डॉलर
LNG जहाज द्वारा भुगतान (कतार छोड़ने के लिए) 40 लाख डॉलर
तेल टैंकरों द्वारा भुगतान 30 लाख डॉलर से अधिक
दैनिक जहाज पारगमन 36 से 38 जहाज
कुल पारगमन में सालाना वृद्धि 3.7%
कुल जहाज (वित्तीय वर्ष की पहली छमाही) 6,288

होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और असर

ईरान और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। ब्रिटिश सेना ने बताया कि ईरानी गनबोट्स ने टैंकरों पर गोलीबारी की है और कंटेनर जहाजों पर मिसाइल दागी गई है। अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IMO) के अनुसार, इस मार्ग में 20,000 से ज्यादा नाविक फंसे हुए हैं। भारतीय जहाजों पर भी गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि इस टकराव से दुनिया में अब तक का सबसे गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है।