अमेरिका पर बढ़ा युद्ध का दबाव, ईरान से जंग के बीच पेंटागन ने की हथियारों का उत्पादन तेज करने की मांग.

Aanya10 August 20263 min read80 viewsWorld
अमेरिका पर बढ़ा युद्ध का दबाव, ईरान से जंग के बीच पेंटागन ने की हथियारों का उत्पादन तेज करने की मांग.

ईरान के साथ लंबे समय से चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और अब अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपने हथियारों तथा मिसाइलों के खाली हो रहे भंडार को तेजी से भरने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वॉशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार 10 अगस्त को आई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि पेंटागन ने देश की बड़ी रक्षा कंपनियों से हथियारों के उत्पादन में भारी तेजी लाने और समय-सीमा को कम करने के स्पष्ट प्रस्ताव मांगे हैं। इस पूरी स्थिति का असर आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर और रक्षा बजट पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।

डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी का कड़ा निर्देश

रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) की एक रिपोर्ट के हवाले से यह बात सामने आई है कि डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीफन फीनबर्ग ने रक्षा उद्योग के प्रमुखों को एक विशेष मेमो भेजा है। इस मेमो के माध्यम से कंपनियों से कहा गया है कि वे या तो अपने उत्पादन की क्षमता को बहुत ज्यादा बढ़ाएं या फिर डिलीवरी के शेड्यूल को बेहद तेज करें, या फिर इन दोनों चीजों के लिए अपनी पूरी योजना जल्द से जल्द पेश करें। कंपनियों को इस पर अपने प्रस्ताव तैयार करने के लिए केवल 21 दिनों का समय दिया गया है।

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स्टीफन फीनबर्ग ने अपने इस मेमो में इस बात के साफ संकेत दिए हैं कि अब हथियारों के विकास और उनके उत्पादन के पुराने और लंबे चक्र को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। पेंटागन की यह साफ इच्छा है कि महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों की क्षमता को रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार से बढ़ाया जाए। साथ ही भविष्य में लगातार और बड़ी मात्रा में आने वाले ऑर्डर्स को समय पर पूरा करने के लिए रक्षा कंपनियों को अपनी बुनियादी सुविधाओं और पूरी आपूर्ति श्रृंखला में भारी निवेश करने की सख्त जरूरत है।

इन हथियारों और मिसाइलों की मांग सबसे ज्यादा

मौजूदा समय में पेंटागन की मुख्य प्राथमिकताओं में अगली पीढ़ी की एयर-डिफेंस प्रणालियां, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और अंतरिक्ष आधारित मिसाइल-ट्रैकिंग क्षमताएं सबसे ऊपर शामिल हैं। ईरान के साथ चल रहे इस भीषण युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने बहुत बड़ी संख्या में सटीक-निर्देशित हथियारों और एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर का खुलकर इस्तेमाल किया है, जिसके कारण रक्षा भंडार तेजी से कम हुआ है।

द वॉशिंगटन पोस्ट की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती केवल चार हफ्तों के भीतर ही अमेरिकी सेना ने 850 से अधिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया था। इसके अलावा ईरानी सेना की तरफ से दागे गए हमलों को नाकाम करने और रोकने के लिए 1,000 से अधिक एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किए जाने का अनुमान सैन्य अधिकारियों ने दिया है। संघर्ष के शुरुआती दो दिनों में ही अमेरिकी सेना ने करीब 5.6 अरब डॉलर मूल्य के गोला-बारूद खर्च कर दिए थे, जिससे अमेरिकी हथियार भंडार पर भारी दबाव शुरुआती दौर से ही दिखने लगा था।

बजट पर दबाव और राजनीतिक बहस

ईरान के साथ चल रहे इस कड़े संघर्ष ने अमेरिकी रक्षा बजट पर भी भारी दबाव डाल दिया है। जुलाई महीने में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक पेंटागन को इस युद्ध की वजह से गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है और इसी के चलते उसने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस से 67 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। अधिकारियों का यह साफ कहना है कि अगर समय पर अतिरिक्त धन नहीं मिला तो सेना के सामान्य प्रशिक्षण और रखरखाव जैसे जरूरी कामों को भी सीमित करना पड़ सकता है।

पेंटागन की तरफ से हथियारों के भंडार को दोबारा भरने के लिए उठाए जा रहे इन कदमों से अमेरिकी संसद में एक बार फिर तीखी राजनीतिक बहस शुरू होने की पूरी उम्मीद है। देश के सांसद पहले से ही इस युद्ध की भारी लागत, बढ़ते सैन्य खर्च और प्रशासन की ईरान नीति को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। हालांकि देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से हथियारों की कमी की सभी खबरों को सिरे से खारिज किया है और उनका यह कहना है कि अमेरिका के पास आज भी पर्याप्त मात्रा में हथियार मौजूद हैं और नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं।

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