शंघाई सहयोग संगठन समिट में होगी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और पुतिन की मुलाकात, अमेरिका के दबाव के बीच बड़ी तैयारी

Nura Basta26 August 20262 min read42 viewsWorld
शंघाई सहयोग संगठन समिट में होगी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और पुतिन की मुलाकात, अमेरिका के दबाव के बीच बड़ी तैयारी

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin अगले हफ्ते एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। यह बड़ा सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित किया जा रहा है, जो 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस कार्यक्रम से जुड़े अन्य आयोजन 30 अगस्त से 3 सितंबर तक चल सकते हैं, जिसमें दुनिया के कई बड़े नेता हिस्सा लेंगे।

अधिकारियों ने की बैठक की पुष्टि

रूस में ईरान के राजदूत Kazem Jalali ने बुधवार, 26 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात की पुष्टि की। इससे पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि रूसी राष्ट्रपति इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भी शामिल होने की पूरी उम्मीद है, जिससे इस बैठक का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

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आर्थिक दबाव और कूटनीतिक हलचल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आगामी बैठक एक तरह की क्राइसिस मैनेजमेंट यानी संकट से निपटने की बैठक होगी। दोनों देश इस समय अमेरिका की तरफ से बनाए जा रहे भारी आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। अमेरिकी सरकार ने हाल ही में 'Operation Economic Outcast' नाम से एक अभियान शुरू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य रूस को यह जवाबदेह ठहराना है कि वह कथित तौर पर सोने के लेन-देन, तेल की खरीद और विमानन संपर्कों के जरिए ईरान पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रहा है।

अमेरिका और चीन का रुख

यह कूटनीतिक बैठक ऐसे समय में हो रही है जब सीआईए के निदेशक John Ratcliffe ने हाल ही में मॉस्को का एक अघोषित दौरा किया था। इस दौरे के दौरान उन्होंने रूस से यह अनुरोध किया था कि वह ईरान पर दबाव बनाए ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सके। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मॉस्को ने इस अनुरोध को मानने से इनकार कर दिया। वहीं दूसरी तरफ, चीन ने अमेरिका के हालिया प्रतिबंधों पर अपना कड़ा जवाब दिया है। चीन ने वॉशिंगटन से यह आग्रह किया है कि वह ईरान के साथ उसके सहयोग में किसी तरह की बाधा न डाले और यह साफ किया कि दोनों देशों के बीच आपसी गतिविधियां पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हैं।

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