फिलीपींस की राजधानी मनीला में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ. हजारों की संख्या में मजदूर और सामाजिक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारी बेहतर वेतन और बढ़ती महंगाई से राहत पाने के लिए मलाकानांग पैलेस की ओर मार्च करते दिखे.

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें और विरोध का कारण

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व लेबर कोएलिशन किलुसांग मायो यूनो (KMU) और राजनीतिक गठबंधन बागांग आलियांसांग माकाबायन (बयान) ने किया. मनीला में अमेरिकी दूतावास समेत कई जगहों पर लगभग 8,000 लोग जमा हुए. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के पुतले भी जलाए. मजदूरों का कहना है कि मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से ऊर्जा आपूर्ति में दिक्कत आई है, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी और आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है.

आर्थिक संकट और सरकार का कदम

फिलीपींस की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है. हाउस माइनॉरिटी लीडर मार्सेलिनो लिबानन ने कहा कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से अब वेतन बढ़ाना पूरी तरह सही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि जून महीने से न्यूनतम वेतन में वृद्धि की घोषणा हो सकती है. वहीं, सरकार की तरफ से श्रम और रोजगार विभाग (DOLE) ने देश भर में करीब 1,65,000 नौकरियों के लिए जॉब फेयर का आयोजन किया. सुरक्षा के लिए फिलीपींस नेशनल पुलिस (PNP) ने 1,06,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए, हालांकि अमेरिकी दूतावास के पास हुई रैली में सात पुलिसकर्मी घायल हो गए.

फिलीपींस की आर्थिक स्थिति का विवरण

विवरण आंकड़े/डेटा
मुद्रा दर (पेसो प्रति डॉलर) 61.2820 से 61.32
हेडलाइन मुद्रास्फीति (Inflation) 4.1 प्रतिशत
परिवहन लागत में वृद्धि 9.9 प्रतिशत
उपलब्ध नौकरियां (Job Fair) 1,65,000
तैनात पुलिसकर्मी 1,06,000
प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 8,000

Frequently Asked Questions (FAQs)

फिलीपींस में मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया?

मजदूरों ने 1 मई 2026 को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर बेहतर वेतन, महंगाई से राहत और श्रमिकों के अधिकारों के सम्मान के लिए विरोध प्रदर्शन किया.

मिडल ईस्ट के युद्ध का फिलीपींस पर क्या असर पड़ा है?

मध्य पूर्व संघर्ष की वजह से ईंधन की कीमतें बढ़ीं, जिससे परिवहन लागत में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और आम जनता को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है.