पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसनसोल में एक बड़ा रोड शो किया, जहां भारी संख्या में लोग उन्हें देखने और सुनने पहुंचे। बीजेपी ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी है और प्रधानमंत्री खुद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रैलियां और रोड शो कर रहे हैं। इस दौरान सड़क पर भारी भीड़ जमा हुई और लोगों ने पार्टी के समर्थन में उत्साह दिखाया।

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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का पूरा शेड्यूल क्या है?

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान पहले ही कर दिया था। इस बार चुनाव मुख्य रूप से दो चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मई के पहले हफ्ते में यह साफ हो जाएगा कि राज्य में किसकी सरकार बनेगी। चुनाव से जुड़ी मुख्य तारीखें नीचे दी गई हैं:

  • पहला चरण: 23 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे
  • दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026 को मतदान होगा
  • नतीजे: 4 मई 2026 को वोटों की गिनती होगी

प्रधानमंत्री के रोड शो और चुनावी वादों की मुख्य बातें

प्रधानमंत्री ने आसनसोल में औद्योगिक विकास को फिर से पटरी पर लाने का वादा किया है। उन्होंने अपने संबोधन में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और राज्य में माफिया राज को खत्म करने की बात कही है। बीजेपी ने अपने प्रचार में 7वीं वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और ‘डबल इंजन’ की सरकार बनाने पर जोर दिया है। पार्टी का मानना है कि इससे राज्य का विकास तेज होगा।

बंगाल चुनाव के मुख्य चेहरे और अहम जानकारी

इस चुनाव में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है। जहां एक तरफ पीएम मोदी और अमित शाह मोर्चा संभाले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी के लिए लगातार रैलियां कर रही हैं। आसनसोल और उसके आसपास के इलाकों में राजनीतिक समीकरण काफी बदल चुके हैं।

मुख्य व्यक्ति पार्टी ताजा अपडेट
नरेंद्र मोदी BJP हल्दिया, आसनसोल और सूरी में रैलियां की
ममता बनर्जी TMC वोटर लिस्ट से नाम हटने पर विरोध जताया
अमित शाह BJP बीजेपी का ‘संकल्प पत्र’ जारी करेंगे
शत्रुघ्न सिन्हा TMC आसनसोल क्षेत्र के मौजूदा नेता

चुनाव प्रचार के बीच राज्य में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर भी विवाद छिड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने करीब 90 लाख नाम हटाए जाने पर आपत्ति जताई है और इसके लिए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की आलोचना की है। वहीं बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत अब घोषणापत्र और जमीनी प्रचार पर लगा दी है।