पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार सतर्क हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बुधवार 1 अप्रैल 2026 को शाम 7 बजे राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (CCS) की अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में पश्चिम एशिया के ताजा हालातों और युद्ध जैसे घटनाक्रमों से भारत पर पड़ने वाले असर की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर समीक्षा बैठकें की हैं ताकि देश की रणनीतिक और आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रखा जा सके।

ℹ️: यमन के हूतियों ने इजरायल पर दागीं मिसाइलें, हमले की जिम्मेदारी लेकर दी बड़ी चेतावनी

पश्चिम एशिया के ताजा हालात और बैठक का मुख्य एजेंडा

इस बैठक का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष है। हाल ही में अमेरिकी और इजरायली सेना की कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी हमले हुए हैं। इस तनाव के कारण कई महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते प्रभावित हुए हैं। बैठक में इन मुख्य बिंदुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है:

  • ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव से पैदा हुई वैश्विक स्थिति।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में आई रुकावट।
  • कतर के उत्तरी समुद्री क्षेत्र में तेल टैंकर ‘एक्वा 1’ पर हुए मिसाइल हमले के बाद की सुरक्षा स्थिति।
  • भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते सामरिक समीकरण।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर की समीक्षा

सरकार की कोशिश है कि इस अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर भारत की आम जनता की जेब और बाजार पर न पड़े। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति बनाई जाएगी। प्रधानमंत्री ने पहले ही मंत्रियों और सचिवों के एक समूह को इस स्थिति से निपटने के निर्देश दिए हैं ताकि देश में महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कमी न हो।

महत्वपूर्ण क्षेत्र सरकार की योजना और ध्यान
खेती और किसान खरीफ सीजन के लिए खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
ईंधन और ऊर्जा कच्चे तेल की सप्लाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नजर रखना।
बाजार नियंत्रण जरूरी चीजों की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना।
व्यापार निर्यातकों और एमएसएमई (MSME) सेक्टर की सप्लाई चेन को बचाना।

इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ-साथ आर्थिक मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि पश्चिम एशिया के इस संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था और सामान्य जनजीवन स्थिर बना रहे।