प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में हुए G7 समिट के दौरान पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz में समुद्री व्यापार में आने वाली रुकावटों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पीएम मोदी ने इस बात का भी जिक्र किया कि इस संघर्ष के कारण कई भारतीय नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

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नाविकों की सुरक्षा पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना और वहां काम करने वाले नाविकों की जान बचाना दुनिया की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों का स्वागत किया, लेकिन इस इलाके के friendly देशों को होने वाले नुकसान पर दुख जताया।

भारतीय मरीनर्स का नुकसान

भारत इस संघर्ष में जान गंवाने वाले देशों में से एक है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, कम से कम तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई है, जिनमें डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पाटनला सुरेश शामिल हैं। Forward Seamen’s Union of India (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने मांग की है कि नाविक सैनिक नहीं होते, इसलिए उन्हें सैन्य हमलों के बीच खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय जांच और जहाजों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग की है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कोशिशें

भारत इस मुद्दे को दुनिया के सामने मजबूती से रख रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत के प्रतिनिधि राजदूत हरिश पार्वतीनेनी ने कहा कि कमर्शियल जहाजों पर हमला करना पूरी तरह गलत है और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी ब्रिटेन में आयोजित एक बैठक में Strait of Hormuz को जल्द खोलने और तनाव कम करने की अपील की थी।

भारत पर असर

भारत के लिए यह रास्ता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी एलपीजी (LPG) की एक बड़ी मात्रा इसी रास्ते से मंगवाता है। पीएम मोदी ने लोकसभा में बताया था कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बनाए रखने के लिए भारत लगातार कोशिश कर रहा है। भारत सरकार का मुख्य ध्यान इस समय शांति स्थापित करने और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।