भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत की और ईरान द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे बार-बार हमलों की कड़ी निंदा की है। पीएम मोदी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां सऊदी अरब की सुरक्षा और उसकी संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा हैं। भारत ने इस मामले में सऊदी अरब के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की है। यह बातचीत क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच हुई है।

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पीएम मोदी और सऊदी प्रिंस के बीच हुई बातचीत में क्या खास रहा?

28 मार्च 2026 को हुई इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से उन हमलों का विरोध किया जो सऊदी अरब की सीमा और सुरक्षा को निशाना बना रहे हैं। इससे पहले भी 2 मार्च को दोनों नेताओं के बीच इसी विषय पर चर्चा हुई थी। पीएम मोदी ने भारत का रुख साफ करते हुए कहा कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करेंगे जो क्षेत्रीय शांति को भंग करती हो। सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा स्थिति सीधे तौर पर उनके कामकाज और यात्रा पर असर डालती है।

ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव की वर्तमान स्थिति क्या है?

क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ हफ्तों में कई बड़े घटनाक्रम हुए हैं जिनकी जानकारी नीचे टेबल में दी गई है:

तारीख महत्वपूर्ण घटनाक्रम
28 मार्च 2026 डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर बड़े अमेरिकी हमले और वहां सत्ता परिवर्तन का दावा किया।
21 मार्च 2026 पीएम मोदी ने कतर के अमीर से बात कर ईरानी कार्रवाई को संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
20 मार्च 2026 बहरीन के किंग के साथ बातचीत में भी पीएम मोदी ने ईरानी हमलों की निंदा की।
15 मार्च 2026 ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की अपनी नीति जारी रखने की बात कही।

भारत लगातार ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर वह कोई समझौता नहीं करना चाहता। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इस मामले में ईरानी विदेश मंत्री के साथ लगातार संपर्क में बने हुए हैं ताकि क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयास किए जा सकें। भारत की मुख्य चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की है क्योंकि इससे व्यापारिक जहाजों का आवागमन जुड़ा है।