प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से 20 मई 2026 तक पांच देशों की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरे में UAE और यूरोप के देश शामिल हैं, जिसकी जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में दी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मिडिल ईस्ट के संकट की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर काफी दबाव है।
पीएम मोदी के इस दौरे का पूरा शेड्यूल क्या है?
पीएम मोदी अपनी यात्रा की शुरुआत UAE से करेंगे, जहाँ वह राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान से मुलाकात करेंगे। यहाँ दोनों नेता ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद वह यूरोप के दौरों पर निकलेंगे:
- Netherlands: 15 से 17 मई तक यहाँ रहेंगे और राजा विलेम-अलेक्जेंडर, रानी मैक्सिमा और प्रधानमंत्री रॉब जेटन से मिलेंगे। यहाँ डिफेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर्स पर बात होगी।
- Sweden: 17 मई को प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसोन के साथ बातचीत करेंगे।
- Norway: 18 मई को भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
- Italy: 19 से 20 मई तक राष्ट्रपति सर्जियो मात्तरेला और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से द्विपक्षीय चर्चा करेंगे।
तेल की महंगाई और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा?
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं। इससे भारत के डॉलर भंडार पर असर पड़ा है, जिसे संभालने के लिए पीएम मोदी ने देश में ईंधन बचाने, सोने का आयात कम करने और गैर-जरूरी यात्राएं घटाने जैसे कड़े कदम उठाने को कहा है। इन घोषणाओं का असर बाजार पर भी दिखा है।
| विषय | प्रभाव या उपाय |
|---|---|
| शेयर बाजार | 11 मई को भारतीय शेयरों में गिरावट आई |
| भारतीय रुपया | एक महीने में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई |
| विदेशी मुद्रा भंडार | तेल की बढ़ती कीमतों से दबाव बढ़ा |
| ईंधन | बचत करने के निर्देश दिए गए |
| सोने का आयात | आयात कम करने की अपील की गई |
| विदेशी यात्रा | यात्राएं कम करने को कहा गया |
| कच्चा तेल | मिडिल ईस्ट संकट से दाम बढ़े |
Frequently Asked Questions (FAQs)
पीएम मोदी का पांच देशों का दौरा कब से कब तक है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा 15 मई से 20 मई 2026 तक निर्धारित है, जिसमें UAE और यूरोप के चार देश शामिल हैं।
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार और निवेश बढ़ाना, भारत-EU ट्रेड डील को आगे बढ़ाना और मिडिल ईस्ट संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
