फ्रांस के एवियन में हो रही G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में उन भारतीय नाविकों की मौत पर दुख जताया, जो हाल ही में अमेरिकी सैन्य हमले में मारे गए थे। पीएम मोदी ने साफ कहा कि समुद्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।

क्या था पूरा मामला

10 जून 2026 को ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी नौसेना ने एक मिसाइल हमला किया था। यह हमला MT Settebello नाम के एक तेल टैंकर पर हुआ, जिस पर पलाऊ का झंडा था। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों—पतनाला सुरेश, आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया की जान चली गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कन्फर्म किया कि उनके विमानों ने जहाज के इंजन रूम पर दो हेलफायर मिसाइलें दागी थीं।

भारत सरकार का कड़ा विरोध

भारत सरकार ने इस घटना पर अमेरिका के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है और एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब किया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से सीधे बात करते हुए कहा कि कमर्शियल जहाजों पर ऐसे जानलेवा हमले जायज नहीं हैं। शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसे समुद्री परिवार के लिए एक बड़ी क्षति बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मांग की कि ये हमले तुरंत रुकने चाहिए और बातचीत से समाधान निकाला जाना चाहिए।

अमेरिका और ईरान का स्टैंड

अमेरिका का कहना है कि वह अप्रैल 2026 से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रहा है ताकि ईरान पर दबाव बनाया जा सके। अमेरिकी सेना का दावा है कि MT Settebello जहाज ने नियमों का पालन नहीं किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में कोई माफी नहीं मांगी है और अपना फैसला सही बताया है। वहीं, ईरान ने इन हमलों को समुद्री डकैती और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया है।

इस घटना की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने G7 नेताओं से अपील की कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखा जाए ताकि नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।