प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे जहां उन्होंने तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस बैठक में भारत और पांच नॉर्डिक देशों ने मिलकर भविष्य के विकास के लिए एक नया रास्ता तैयार किया है। इस दौरे के दौरान पर्यावरण की रक्षा और नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर खास जोर दिया गया। यह दौरा इसलिए भी खास रहा क्योंकि 43 साल में पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री नॉर्वे गया है।
भारत और नॉर्डिक देशों के बीच क्या खास समझौता हुआ?
इस समिट के बाद एक साझा बयान जारी किया गया जिसमें भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्तों को ‘ट्रस्टेड ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया गया। इसमें डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन शामिल हैं। सभी देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमति जताई। यह बैठक स्टॉकहोम (2018) और कोपेनहेगन (2022) में हुई पिछली बैठकों को आगे बढ़ाने के लिए बुलाई गई थी।
नॉर्वे दौरे से भारत को क्या फायदा होगा और कितनी मिलेगी इन्वेस्टमेंट?
प्रधानमंत्री मोदी ने 18 मई 2026 को नॉर्वे के साथ द्विपक्षीय संबंधों को ‘ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ में बदला। इस दौरान दोनों देशों ने क्लीन एनर्जी, टिकाऊ विकास, ब्लू इकोनॉमी और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में 12 समझौतों पर साइन किए। व्यापार को बढ़ाने के लिए इंडिया-ईएफटीए (India-EFTA TEPA) समझौते का जिक्र किया गया जो अक्टूबर 2025 में लागू हुआ था।
इस समझौते के जरिए भारत सरकार ने 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में नॉर्डिक देशों के साथ भारत का कुल व्यापार 19 अरब डॉलर है। इसके अलावा डिफेंस, स्पेस और आर्कटिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
Frequently Asked Questions (FAQs)
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 2026 कहां और कब हुआ?
यह सम्मेलन 19 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया गया था।
India-EFTA TEPA समझौते से भारत को क्या उम्मीद है?
इस समझौते के तहत भारत सरकार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और लगभग 10 लाख नई नौकरियों की उम्मीद कर रही है।
