प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से 20 मई 2026 तक UAE और यूरोप के चार देशों की यात्रा पर जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा का पूरा ब्यौरा जारी कर दिया है। इस दौरे का मुख्य मकसद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी यानी ऊर्जा सुरक्षा और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाना है।

पीएम मोदी के दौरे का पूरा शेड्यूल क्या है?

विदेश मंत्रालय के सचिव (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने मीडिया ब्रीफिंग में यात्रा की तारीखें बताई हैं। पीएम मोदी की यात्रा का समय इस प्रकार रहेगा:

  • UAE: 15 मई
  • नीदरलैंड: 15 से 17 मई
  • स्वीडन: 17 से 18 मई
  • नार्वे: 18 से 19 मई (19 मई को ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन होगा)
  • इटली: 19 से 20 मई

इस दौरे में किन खास मुद्दों पर चर्चा होगी?

इस यात्रा को ऊर्जा सुरक्षा के मिशन के तौर पर देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से तेल बाजार पर असर पड़ा है, जिसे देखते हुए यह दौरा अहम है।

  • UAE: यहाँ राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान के साथ ऊर्जा सहयोग और UAE में रहने वाले 45 लाख भारतीयों के कल्याण पर बात होगी।
  • नीदरलैंड: यहाँ डिफेंस, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और वाटर मैनेजमेंट पर चर्चा होगी।
  • स्वीडन: पीएम मोदी यहाँ एआई (AI), स्टार्टअप, स्पेस और जलवायु बदलाव जैसे मुद्दों पर बात करेंगे।
  • नार्वे: यह 43 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नार्वे यात्रा होगी। यहाँ ब्लू इकोनॉमी और आर्कटिक मुद्दों पर चर्चा होगी।
  • इटली: राष्ट्रपति सर्जियो मटेला और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ डिफेंस सहयोग और भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर चर्चा होगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पीएम मोदी की UAE यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?

UAE की यात्रा ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। साथ ही यहाँ रहने वाले 45 लाख भारतीयों के मुद्दों पर भी बात होगी।

नार्वे यात्रा की क्या खासियत है?

यह दौरा इसलिए खास है क्योंकि पिछले 43 सालों में कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री नार्वे नहीं गया है। यहाँ ब्लू इकोनॉमी और आर्कटिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।