Israel-Lebanon Ceasefire: पोप लियो XIV ने युद्ध विराम को बताया उम्मीद की किरण, अंगोला में 1 लाख लोगों के सामने की बात
पोप लियो XIV ने अंगोला की राजधानी लुआंडा के पास एक विशाल प्रार्थना सभा में इसराइल और लेबनान के बीच हुए युद्ध विराम की जमकर तारीफ की है. इस मौके पर करीब 1 लाख लोग मौजूद थे. पोप ने इस कदम को मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक उम्मीद की किरण बताया है.
युद्ध विराम से जुड़ी अहम बातें क्या हैं?
अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइल और लेबनान के बीच युद्ध विराम 16 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था. यह शुरुआती तौर पर 10 दिनों के लिए लागू किया गया है. हालांकि, इस बीच कुछ तनाव भी देखा गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में इसराइली गोलाबारी की खबरें आई हैं, जिसकी वजह से युद्ध विराम का उल्लंघन हुआ है. दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह पर UN शांति सेना के एक कैंप पर हमला करने का आरोप है, जिसमें एक फ्रांसीसी शांतिदूत की जान चली गई और तीन अन्य घायल हो गए.
दुनिया के बड़े नेताओं और संस्थाओं का क्या रुख है?
इस युद्ध विराम पर अलग-अलग देशों और नेताओं ने अपनी राय दी है. डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे लेबनान के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताया है, लेकिन उन्होंने हिजबुल्लाह को चेतावनी दी है कि वह समझौते का पालन करे. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी इस फैसले का स्वागत किया और सभी पक्षों से इसे बनाए रखने की अपील की है. वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते बंद कर सकता है.
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| युद्ध विराम की शुरुआत | 16 अप्रैल 2026 (अमेरिका की मध्यस्थता) |
| पोप का बयान (अंगोला) | 19 अप्रैल 2026, इसे उम्मीद की किरण बताया |
| डोनाल्ड ट्रम्प | ऐतिहासिक दिन बताया, हिजबुल्लाह को चेतावनी दी |
| संयुक्त राष्ट्र (UN) | युद्ध विराम का स्वागत किया |
| ताज़ा घटना | हिजबुल्लाह हमले में एक फ्रांसीसी शांतिदूत की मौत |
| ईरान की स्थिति | होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते बंद करने की धमकी |
| लेबनान के राष्ट्रपति | कहा कि लेबनान अब किसी का मोहरा नहीं बनेगा |