अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते का पोप लियो XIV ने स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले से मिडिल ईस्ट में आपसी भरोसा, सुरक्षा और स्थिरता आएगी। इस अहम समझौते पर शुक्रवार को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

पोप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस डील की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह समझौता बातचीत और धैर्य के साथ किए गए काम का नतीजा है। उन्होंने उन सभी देशों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस बातचीत को संभव बनाने में मदद की। पोप का मानना है कि इस कदम से लोगों के बीच सहयोग और संवाद बढ़ेगा।

वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस प्रक्रिया में कुछ सख्ती दिखाई है। उन्होंने साफ किया कि यह युद्धविराम (ceasefire) शर्तों पर टिका है और अभी पूरी तरह पक्का नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह समझौता (MoU) अंतिम दस्तावेज नहीं है और अगर ईरान ने शर्तों को नहीं माना, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

पोप लियो XIV ने ये बातें बुधवार, 17 जून 2026 को कहीं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने मंगलवार को Castel Gandolfo, Italy में पत्रकारों से बात करते समय यह जानकारी दी थी।

Sushma Kumari

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