West Asia Tension: राष्ट्रपति Macron ने ईरान पर दबाव बनाने से किया मना, कहा शांति लौटे तभी दुनिया की अर्थव्यवस्था बचेगी

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति लौटने की अपील की है. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को फिर से भरोसा दिलाने के लिए इस इलाके में स्थिरता बहुत जरूरी है. Macron ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के जबरदस्ती वाले कदमों या दबाव का विरोध किया है.

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ईरान के साथ बातचीत पर क्या बोले राष्ट्रपति Macron?

राष्ट्रपति Macron ने साफ किया कि ईरान के साथ बातचीत व्यवस्थित तरीके से होनी चाहिए. उन्होंने अमेरिका के उस नजरिए का विरोध किया जिसमें सैन्य दबाव या आर्थिक पाबंदियों का इस्तेमाल किया जाता है. Macron के मुताबिक, बातचीत के जरिए ही मसलों को सुलझाना सही है, न कि टारगेटेड ब्लॉकैड या इस तरह के अन्य उपायों से. उन्होंने ईरान और लेबनान में युद्धविराम को बनाए रखने और परमाणु व मिसाइल प्रोग्राम पर कूटनीतिक बातचीत जारी रखने पर जोर दिया.

गैस सप्लाई और Strait of Hormuz पर बड़ा खतरा

International Energy Agency (IEA) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया कि पश्चिम एशिया के इस विवाद की वजह से 2026 से 2030 के बीच करीब 120 बिलियन क्यूबिक मीटर LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की सप्लाई कम हो सकती है. इस स्थिति से निपटने के लिए फ्रांस और ब्रिटेन मिलकर काम कर रहे हैं. दोनों देश Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए रणनीतिक और सैन्य योजनाएं बना रहे हैं, क्योंकि यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

EU और Kaja Kallas का ईरान पर क्या कहना है?

EU की विदेश प्रमुख Kaja Kallas ने भी ईरान के साथ चर्चा की बात कही है. उन्होंने कहा कि इन बातचीत में परमाणु विशेषज्ञों को शामिल करना जरूरी है ताकि ईरान और ज्यादा खतरनाक न बन जाए. Kallas ने यह भी बताया कि मिसाइल प्रोग्राम, प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन और साइबर हमलों जैसे मुद्दों को हल करना बहुत आवश्यक है. ये बातें साइप्रस के निकोसिया में आयोजित EU समिट के दौरान सामने आईं.