सऊदी अरब के प्रिंस तुर्की अल-फिसाल ने ईरान को सख्त लहजे में नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि ईरान दुनिया पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश छोड़ दे और अलग-अलग देशों में हथियारबंद समूहों को खड़ा करना बंद करे। उनका मानना है कि अगर इलाके में शांति चाहिए तो ईरान को अपनी सोच बदलनी होगी।

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प्रिंस तुर्की अल-फिसाल ने ईरान के ‘विलायत अल-फकिह’ यानी ‘विद्वान के शासन’ वाले सिद्धांत की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इसी सोच की वजह से ईरान दूसरे देशों में दखल देता है और अस्थिरता फैलाता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान की यह विस्तारवादी नीति पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है।

प्रिंस तुर्की ने तेहरान द्वारा समर्थित समूहों का नाम लेते हुए कहा कि Hezbollah, Houthis और इराक के मिलिशिया जैसे संगठन सिर्फ खून-खराबा बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये समूह उन लोगों को ही दुख पहुँचा रहे हैं जिनकी वे रक्षा करने का दावा करते हैं।

पुराने बयानों और हालिया घटनाओं का जिक्र

प्रिंस तुर्की लंबे समय से ईरान की नीतियों के खिलाफ बोलते रहे हैं। उन्होंने 2017 में पेरिस में एक रैली के दौरान ईरान के मौजूदा शासन को हटाने और वहां के लोगों के साथ हुए अपराधों के लिए अधिकारियों को सजा दिलाने की बात कही थी।

हाल ही में जून 2026 की रिपोर्ट्स में सामने आया कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इराक में नए गुप्त सेल बनाए हैं। इन सेल्स के जरिए कुवैत, सऊदी अरब और UAE पर ड्रोन हमले किए गए। सऊदी अरब ने 11 जून 2026 को जॉर्डन, बहरीन और कुवैत पर हुए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की थी।

प्रिंस तुर्की ने यह भी बताया कि सऊदी अरब ने युद्ध से बचने के लिए बहुत धैर्य दिखाया है। उन्होंने कहा कि सऊदी सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगी, लेकिन वह नहीं चाहती कि युद्ध की वजह से पूरा इलाका तबाह हो जाए।