यूके की फैक्ट्री पर फलस्तीन समर्थकों का कब्जा, इस्राइल को सैन्य मदद देने का लगा आरोप.

Nura Basta24 August 20262 min read40 viewsWorld
यूके की फैक्ट्री पर फलस्तीन समर्थकों का कब्जा, इस्राइल को सैन्य मदद देने का लगा आरोप.

ब्रिटेन में इस्राइल को मिल रही सैन्य मदद के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने बड़ा कदम उठाया है और एक बड़ी फैक्ट्री पर कब्जा कर लिया है। 24 अगस्त 2026 को 'पीपल अगेंस्ट जेनोसाइड' नाम के संगठन के कार्यकर्ताओं ने यूके की मार्टिन-बेकर फैक्ट्री में धावा बोल दिया। इन लोगों का विरोध इस बात को लेकर था कि ब्रिटेन सरकार इस्राइल की सेना को युद्ध के सामान मुहैया करा रही है, जिससे वहां के लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि इस कंपनी की वजह से युद्ध में इस्तेमाल होने वाले विमानों को ताकत मिल रही है।

फैक्ट्री पर क्या है मुख्य आरोप

इस संगठन ने पहले भी इस कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए थे कि वह ऐसे कलपुर्जे बना रही है जो नरसंहार में मदद करते हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक यह फैक्ट्री इस्राइली वायु सेना के एफ-35 फाइटर जेट्स के लिए इजेक्टेड सीट के हिस्से और विस्फोटक कारतूस सप्लाई करती है। ये सारे सौदे और समझौते सितंबर 2023 में हुए पेंटागन के एक बड़े अनुबंध से जुड़े हुए हैं। वित्तीय दस्तावेजों के हिसाब से देखें तो यूके की इस मार्टिन-बेकर यूनिट को एफ-35 के निर्माण के लिए लगभग 303 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुबंध मिले हैं, जिसमें इस्राइल को दिए जाने वाले विमानों के हिस्से भी शामिल हैं। अनुमान लगाया जाता है कि इस्राइल के पास मौजूद इन लड़ाकू विमानों में ब्रिटेन में बने उपकरणों की कुल कीमत 500 मिलियन पाउंड से भी ज्यादा है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल और लेबर पार्टी का फैसला

यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश की राजनीति में इस संघर्ष को लेकर काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। इससे पहले 23 अगस्त 2026 को लेबर पार्टी के सम्मेलन में एक बड़ा प्रस्ताव पास किया गया था। पार्टी के सदस्यों ने वोटिंग करके यह माना कि इस्राइल गाजा में जो कर रहा है वह गलत है और उन्होंने वहां हथियारों की बिक्री पूरी तरह से बंद करने की मांग की। हालांकि इस पूरी घटना और फैक्ट्री पर कब्जे के बाद न तो मार्टिन-बेकर कंपनी की तरफ से और न ही यूके सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। इस पूरे विरोध प्रदर्शन की कवरेज प्रमुख मीडिया संस्थान अल जज़ीरा इंग्लिश द्वारा की गई थी, जिसके बाद यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। आम लोग भी अब इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि देश की कंपनियां किस तरह से विदेशों में चल रहे युद्धों में अपना योगदान दे रही हैं। इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे ब्रिटेन की रक्षा नीतियों पर भी असर पड़ सकता है।

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