अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकने का ऐलान किया है. यह फैसला पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों की अपील के बाद लिया गया है. इस कदम से क्षेत्र में शांति और स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है.

‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ क्या था और इसे क्यों रोका गया?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 और 6 मई 2026 को इस ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की. यह ऑपरेशन ईरान द्वारा जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बाद कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया था. अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और युद्ध सचिव Pete Hegseth ने इसे एक रक्षात्मक और सीमित ऑपरेशन बताया था. ट्रंप ने बताया कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ एक व्यापक समझौते पर अच्छी प्रगति हुई है, इसलिए यह फैसला लिया गया. हालांकि, ट्रंप ने साफ किया है कि ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी अभी भी पूरी तरह लागू रहेगी.

सऊदी अरब और पाकिस्तान ने इसमें क्या भूमिका निभाई?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले के लिए उनका आभार जताया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान की अपील का नतीजा है. प्रधानमंत्री शरीफ के मुताबिक, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति और सुलह के लिए ट्रंप से अनुरोध किया था. पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए विवाद सुलझाने का समर्थन किया है और उम्मीद जताई है कि इस पहल से एक स्थायी समझौता होगा.

Frequently Asked Questions (FAQs)

प्रोजेक्ट फ्रीडम कब शुरू हुआ था?

यह ऑपरेशन मई 2026 के आसपास शुरू हुआ था. इससे पहले फरवरी 2026 में अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच विवाद शुरू हुआ था, जिससे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हुई थी.

क्या ईरान पर लगी नाकेबंदी हट गई है?

नहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट फ्रीडम को अस्थायी रूप से रोकने के बावजूद ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी अभी भी पूरी तरह से लागू रहेगी.