चीन में एपेक समिट के दौरान हो सकती है पुतिन और ट्रंप की मुलाकात, रूस ने दिए संकेत

चीन में होने वाली आगामी एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कॉपरेशन यानी एपेक (APEC) समिट के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक अहम मुलाकात होने की संभावना जताई जा रही है। मॉस्को से मिली जानकारी के अनुसार, इस साल के आखिर में यानी नवंबर के महीने में चीन में यह बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाना है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि, रूस की राजधानी मॉस्को में स्थित सरकारी कार्यालय क्रेमलिन ने फिलहाल दोनों दिग्गज नेताओं की आमने-सामने की बैठक को लेकर किसी भी तरह की आधिकारिक योजना या पक्की पुष्टि नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
क्रेमलिन के सलाहकार ने क्या कहा
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू ने रूसी मीडिया के हवाले से बताया कि क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने हाल ही में रविवार को एक बयान दिया था। उनके मुताबिक, यदि राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति ट्रंप दोनों ही इस अंतरराष्ट्रीय एपेक समिट में एक साथ शामिल होने पहुंचते हैं, तो उनके बीच आपसी बातचीत की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाएगी। यूरी उशाकोव ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर दोनों नेता एक ही समय पर एक ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहते हैं, तो उनका आपस में मिलना और किसी मुद्दे पर चर्चा करना बहुत स्वाभाविक है।
हालांकि, रूसी अधिकारी ने यह भी साफ किया कि अभी दोनों राष्ट्रपतियों की इस संभावित मुलाकात को लेकर कोई भी ठोस या पक्की रूपरेखा तैयार नहीं की गई है। इस बड़े सम्मेलन में अभी लगभग तीन महीने का समय बाकी है और इस तय समय से पहले दुनिया भर में कई अन्य महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठकें और कार्यक्रम आयोजित होने हैं। इन सभी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही दोनों नेताओं की बैठक को लेकर कोई भी अंतिम फैसला भविष्य में लिया जाएगा, जिसकी जानकारी समय आने पर साझा की जा सकती है।
रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव
एक तरफ जहां पुतिन और ट्रंप की संभावित मुलाकात की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो (NATO) और यूरोपीय संघ यानी ईयू (EU) के देशों पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं। सर्गेई लावरोव का कहना है कि ये पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को भारी सैन्य सहायता मुहैया करा रहे हैं और रूस के खिलाफ लगातार ऐसी नीतियां अपना रहे हैं जो सीधे तौर पर रूस के हितों के खिलाफ हैं।
रूसी सरकारी प्रसारक को दिए गए एक अलग इंटरव्यू के दौरान विदेश मंत्री लावरोव ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नाटो और यूरोपीय संघ के देश अपनी इन तमाम रूस-विरोधी गतिविधियों से कभी भी सार्वजनिक रूप से खुद को अलग नहीं कर पाएंगे। लावरोव ने ब्रिटेन की राजधानी लंदन, बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स, फ्रांस की राजधानी पेरिस और जर्मनी की राजधानी बर्लिन समेत कई बड़े शहरों में बैठे उन तमाम प्रभावशाली लोगों की भी कड़ी आलोचना की, जिन्हें उन्होंने स्पष्ट रूप से रूस-विरोधी मानसिकता और सोच रखने वाला बताया है।
रूसी विदेश मंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि रूस ऐसे सभी लोगों के हर एक कदम पर बहुत बारीकी से नजर बनाए रखेगा। जानकारों का मानना है कि लावरोव का यह तीखा बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक और सामरिक तनाव लगातार बना हुआ है और हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में आने वाले नवंबर महीने में होने वाली एपेक समिट और उसमें रूसी तथा अमेरिकी राष्ट्रपतियों की संभावित बातचीत पर पूरी दुनिया की विशेष नजर बनी हुई है।