Qatar का बड़ा ऐलान, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने के लिए Oman की कूटनीति को मिला पूरा समर्थन

खाड़ी देशों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कतर ने एक बड़ा कदम उठाया है। 26 अगस्त 2026 को कतर ने आधिकारिक तौर पर ओमान के उन कूटनीतिक प्रयासों का पूरा समर्थन किया है जिनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और स्थिरता बढ़ाना है। यह बड़ा फैसला कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी और ओमान के विदेश मंत्री महामहिम सैयद बद्र अलनुसैदी के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत के बाद सामने आया है। इस संबंध में अधिक जानकारी आप आधिकारिक ओमान विदेश मंत्रालय स्रोत पर देख सकते हैं। बातचीत के दौरान कतर ने क्षेत्र में शांतिपूर्ण समाधान निकालने के ओमान के भाईचारे वाले प्रयासों की जमकर सराहना की है।
होरमुज जलडमरूमध्य के लिए अंतरिम ढांचे पर चर्चा
इससे पहले 25 अगस्त 2026 को उच्च स्तर पर कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं, जिनमें कतर के प्रधानमंत्री ने ओमान और ईरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग बातचीत की। यह बातचीत होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक प्रस्तावित अंतरिम ढांचे को लेकर थी। कतर के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता और प्रधानमंत्री के सलाहकार डॉ. माजिद बिन मोहम्मद अल-अंसारी ने स्पष्ट किया कि कतर का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से सामान्य करना है। उन्होंने उन तमाम बयानों को सिरे से खारिज कर दिया जो क्षेत्रीय देशों को किसी बड़े संघर्ष में घसीटने की कोशिश करते हैं। आम लोगों और इस रास्ते से यात्रा करने वालों के लिए यह एक राहत भरी खबर है क्योंकि इससे व्यापार और सप्लाई चेन पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।
ईरान और ओमान के बीच तकनीकी बातचीत जारी
एक तरफ जहां कतर और ओमान शांति की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री सेयद अब्बास अराघची भी पाकिस्तानी अधिकारियों और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्तर पर कूटनीतिक समाधान खोजने में जुटे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच जो नया प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, उसके तहत एक संयुक्त अस्थायी नौवहन गलियारा और बारूदी सुरंग हटाने वाला अभियान शुरू करने की योजना है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़म ग़रीबाबादी ने इस बात की पूरी जानकारी दी कि इस प्रस्ताव के तहत जहाजों को ईरानी जलक्षेत्र से प्रवेश करना होगा और ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से बाहर निकलना होगा। इस पूरी व्यवस्था का मकसद ट्रांजिट से जुड़ी परेशानियों को दूर करना है और आने वाले 30 से 60 दिनों के भीतर तकनीकी बातचीत के जरिए इस पर स्थायी समझौता होने की उम्मीद जताई जा रही है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और कामगारों के लिए इस तरह के कूटनीतिक कदम बहुत मायने रखते हैं क्योंकि क्षेत्र में शांति रहने से ही आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलती हैं।