गाजा की मदद के लिए निकले जहाजों के बेड़े ‘Global Sumud Flotilla’ पर इसराइल ने हमला कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय पानी में इस कार्रवाई के बाद कतर समेत कई देशों में गुस्सा देखा जा रहा है. इसराइल ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है.
अंतरराष्ट्रीय पानी में क्या हुआ और कितने लोग पकड़े गए
सोमवार, 18 मई 2026 को इसराइली सेना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में Global Sumud Flotilla को रोका. इस मिशन में 45 देशों के करीब 426 से 500 लोग शामिल थे, जो गाजा के लिए खाना और दवाइयां लेकर जा रहे थे. इसराइल ने जहाजों पर चढ़कर सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पकड़ लिया और उन्हें Ashdod पोर्ट ले गया. यह इस महीने की दूसरी ऐसी घटना है, इससे पहले 29 अप्रैल को भी क्रेट द्वीप के पास ऐसी ही कार्रवाई हुई थी जिससे कार्यकर्ताओं को वापस भेजना पड़ा था.
कतर और अन्य देशों ने इसराइल के खिलाफ क्या कहा
Qatar के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों का खुला उल्लंघन बताया है. कतर ने मांग की है कि हिरासत में लिए गए लोगों को बिना किसी शर्त के तुरंत छोड़ा जाए और गाजा की अवैध घेराबंदी खत्म की जाए. तुर्की और हमास ने इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है. इसके अलावा तुर्की, बांग्लादेश, ब्राजील, कोलंबिया, इंडोनेशिया, जॉर्डन, लीबिया, मालदीव, पाकिस्तान और स्पेन जैसे 10 देशों ने एक साझा बयान जारी कर इसराइल की इस हरकत की निंदा की है.
इसराइल ने अपनी कार्रवाई के पीछे क्या वजह बताई
Israel के विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस बेड़े का मकसद मानवीय मदद पहुंचाना नहीं बल्कि उकसाना था. उन्होंने दावा किया कि यह मिशन दो हिंसक तुर्की समूहों द्वारा चलाया जा रहा था. इसराइल के मुताबिक, गाजा की समुद्री नाकेबंदी हमास तक हथियारों को पहुंचने से रोकने के लिए एक जरूरी सुरक्षा उपाय है. इसराइल ने यह भी जानकारी दी कि अक्टूबर 2025 से अब तक गाजा में 15.8 लाख टन से ज्यादा मानवीय सहायता और हजारों टन मेडिकल सप्लाई भेजी जा चुकी है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
Global Sumud Flotilla क्या है
यह एक शांतिपूर्ण मानवीय मिशन था जिसमें 50 से ज्यादा जहाजों और 45 देशों के करीब 500 लोगों ने हिस्सा लिया था ताकि गाजा के लिए एक समुद्री रास्ता बनाया जा सके।
इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या रही
कतर, तुर्की और 10 अन्य देशों ने इसराइल की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और मानवीय कानून का उल्लंघन बताया है।
