Al-Aqsa Mosque में इसराइली सेटलर्स की घुसपैठ, झंडा फहराने पर कतर ने जताया कड़ा विरोध, बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

कतर ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इसराइली सेटलर्स द्वारा घुसपैठ और वहां इसराइल का झंडा फहराने की कड़ी निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया। इस घटना के बाद कतर ने पूरी दुनिया से इस तरह की हरकतों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

अल-अक्सा मस्जिद में क्या हुआ और कतर ने क्या कहा?

21 अप्रैल 2026 को दर्जनों इसराइली सेटलर्स ने इसराइली पुलिस की सुरक्षा में अल-अक्सा मस्जिद परिसर में प्रवेश किया। वहां उन्होंने न केवल इसराइली झंडा फहराया, बल्कि डोम ऑफ द रॉक के पास कुछ धार्मिक रस्में भी निभाईं। कतर के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इसे दुनिया भर के मुस्लिमों के लिए उकसावा और पवित्र स्थल के इतिहास के साथ खिलवाड़ बताया।

कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या मांग की है?

कतर ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यरूशलेम और वहां के पवित्र स्थलों के प्रति अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी निभानी होगी। कतर के मुताबिक, इसराइली शासन की इन बार-बार होने वाली गलतियों का मजबूती से सामना किया जाना चाहिए। कतर ने अल-अक्सा मस्जिद के धार्मिक दर्जे को कम करने की किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

फिलिस्तीन के अधिकारों पर कतर का क्या स्टैंड है?

कतर ने एक बार फिर फिलिस्तीन के हक में अपना समर्थन जताया। मंत्रालय ने कहा कि फिलिस्तीनी लोगों को बिना किसी रोक-टोक के अपनी धार्मिक रस्में निभाने का पूरा अधिकार है। कतर का मानना है कि 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बनना चाहिए, जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलेम हो।