कतर ने दुनिया को यह साफ़ कर दिया है कि वह देशों के बीच झगड़े सुलझाने और शांति बनाए रखने को अपनी बड़ी जिम्मेदारी मानता है। लंदन के चथम हाउस (Chatham House) में विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज बिन सालेह अल खुलाईफी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक विदेशी नीति नहीं है, बल्कि कतर के संविधान का हिस्सा है।
मंत्री अल खुलाईफी ने कतर के संविधान के अनुच्छेद 7 (Article 7) का जिक्र किया। इसमें साफ़ लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना और शांतिपूर्ण तरीके से विवादों को सुलझाना कतर का मुख्य काम है।
अपने लेक्चर के दौरान मंत्री ने बताया कि कतर की रणनीति सभी पक्षों से लगातार बातचीत करने पर टिकी है। चाहे विचार कितने भी अलग हों, बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि किसी पक्ष से बात करने का मतलब यह नहीं है कि कतर उनकी बातों या उनके स्टैंड का समर्थन कर रहा है।
आज के समय में दुनिया के झगड़े बहुत उलझ गए हैं। इनमें सेना, राजनीति, पैसा और टेक्नोलॉजी जैसी कई चीजें जुड़ी हैं और कई बाहरी संगठन भी शामिल हैं। ऐसे माहौल में अल खुलाईफी ने मध्यस्थता (Mediation) को एक रणनीतिक जरूरत बताया।
मंत्री ने कहा कि कतर जैसे मध्यम देशों के लिए ताकत से ज्यादा भरोसे की अहमियत होती है। किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए निष्पक्षता, गोपनीयता और ईमानदारी की जरूरत होती है, न कि किसी पर दबाव डालने की।
उन्होंने नेल्सन मंडेला की एक बात का हवाला देते हुए कहा कि अगर आप अपने दुश्मन के साथ शांति चाहते हैं, तो आपको उसी के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि जब राजनीतिक चुनौतियां सबसे बड़ी हों, तब बातचीत करना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।
