कतर के विदेश मंत्रालय ने साफ़ कर दिया है कि उनके यहाँ अमेरिका और ईरान के बीच कोई बड़ी या सीधी बातचीत नहीं हो रही है। इस बयान के ज़रिए कतर ने उन खबरों को गलत बताया है जिनमें दोनों देशों की सीधी मुलाक़ात का दावा किया गया था। साथ ही, ईरान के जमे हुए पैसों को लेकर भी मंत्रालय ने पूरी स्थिति स्पष्ट की है।

दोहा में बातचीत का सच

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने 30 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी मीटिंग तय नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिकी दूत Steve Witkoff और Jared Kushner दोहा में मौजूद हैं, लेकिन वे केवल कतरी मध्यस्थों (mediators) से मिल रहे हैं, ईरान के अधिकारियों से नहीं।

इससे पहले 29 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ने 30 जून को दोहा में मीटिंग की मांग की है। लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय और उनके सीनियर negotiators ने इस बात से साफ़ इनकार किया था। ईरान का कहना था कि उनकी एक एक्सपर्ट टीम केवल बीच के लोगों के ज़रिए किसी अंतरिम समझौते पर बात करने के लिए दोहा आई है।

6 अरब डॉलर फंड का मामला

पैसों के मामले में कतर ने बताया कि ईरान के 6 अरब डॉलर अभी भी फ्रीज़ हैं और उन्हें तेहरान नहीं भेजा गया है। प्रवक्ता ने साफ़ किया कि ये पैसे 2023 के एक समझौते के दायरे में हैं और इनका इस्तेमाल सिर्फ मानवीय मदद के लिए किया जा सकता है। इस पैसे को जारी करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasury) की मंजूरी ज़रूरी है।

यह जानकारी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के दावे के बिल्कुल उलट है। पेज़ेशकियन ने 29 जून को कहा था कि कतर में जमा 12 अरब डॉलर में से 6 अरब डॉलर वापस मिल रहे हैं और इसे उन्होंने ईरान की बड़ी जीत बताया था। हालांकि, अमेरिका ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कोई भी जमा संपत्ति रिलीज नहीं की गई है।

इस पूरे विवाद और बातचीत के बीच कतर और पाकिस्तान को मुख्य मध्यस्थ के तौर पर देखा जा रहा है जो दोनों देशों के बीच पुल का काम कर रहे हैं।