कतर सरकार ने Washington Post की उस खबर का पूरी तरह से खंडन किया है जिसमें ईरान के साथ गुप्त समझौते का दावा किया गया था। कतर ने कहा है कि Ras Laffan गैस प्लांट को बंद करने का फैसला सिर्फ कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए लिया गया था। सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद बताया है।

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क्या था Washington Post का दावा

Washington Post ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कतर ने युद्ध की शुरुआत में ईरान के साथ गुप्त बातचीत की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक ऐसा समझौता था ताकि ईरान कतर के गैस प्लांट पर हमला न करे। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि कतर ने जानबूझकर गैस उत्पादन बंद किया ताकि अमेरिका और इसराइल पर युद्ध रोकने का दबाव बनाया जा सके।

कतर सरकार और QatarEnergy का जवाब

कतर के इंटरनेशनल मीडिया ऑफिस ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया और इसे नामुमकिन बताया। सरकार का कहना है कि उत्पादन रोकने का फैसला कतर की सेना द्वारा किए गए खतरे के आकलन पर आधारित था। Doha ने साफ किया कि वहां काम करने वाले लोगों की जान को खतरा था, इसलिए सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया। QatarEnergy ने भी स्पष्ट किया कि उन्होंने जो भी जानकारी दी वह पूरी तरह सच और सुरक्षा नियमों के हिसाब से थी।

पिछले हमलों और नुकसान की जानकारी

कतर और ईरान के बीच तनाव पुराना है और पहले भी कई हमले हुए हैं:

  • 2 मार्च 2026: ईरान के ड्रोन हमलों के बाद पहली बार LNG उत्पादन रोका गया था।
  • 18-19 मार्च 2026: मिसाइल हमलों से Ras Laffan के कई प्लांट को भारी नुकसान हुआ, जिसमें Pearl gas-to-liquids प्लांट भी शामिल था।
  • कड़ी कार्रवाई: कतर के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और 18 मार्च को ईरान के सैन्य अधिकारियों को देश से निकाल दिया था।

आर्थिक नुकसान का ब्यौरा

QatarEnergy के CEO ने बताया कि जब तक hostilities यानी दुश्मनी खत्म नहीं होती, उत्पादन फिर से शुरू नहीं होगा। इससे होने वाले आर्थिक नुकसान का विवरण नीचे दिया गया है:

विवरण संभावित नुकसान
सालाना कमाई का नुकसान लगभग 20 अरब डॉलर
LNG एक्सपोर्ट में कमी 12.8 मिलियन टन सालाना
कुल निर्यात का प्रतिशत लगभग 17%
नुकसान की संभावित अवधि 3 से 5 साल

हाल ही में 10 जून 2026 को कतर के तीन LNG टैंकर जो काफी समय से गायब थे, फिर से ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखे। ये टैंकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से बाहर निकलकर एशिया की ओर जा रहे थे।