कतर और मिस्र के अधिकारियों की अलमीन में हुई अहम बैठक, सातवीं उच्च समिति के लिए तैयार हुआ प्लान.

Aanya19 August 20262 min read30 viewsQatar
कतर और मिस्र के अधिकारियों की अलमीन में हुई अहम बैठक, सातवीं उच्च समिति के लिए तैयार हुआ प्लान.

कतर और मिस्र के बीच आपसी रिश्तों को और मजबूत करने के लिए बुधवार, 19 अगस्त 2026 को मिस्र के अलमीन शहर में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक दोनों देशों के बीच होने वाली सातवीं कतर-मिस्र संयुक्त उच्च समिति की बैठक से ठीक पहले की तैयारी के सिलसिले में बुलाई गई थी। इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के कई मंत्रालयों और सरकारी विभागों के अधिकारी शामिल हुए, ताकि आपसी सहयोग के नए रास्तों पर चर्चा की जा सके और पुराने कामों की समीक्षा हो सके।

बैठक में कौन-कौन अधिकारी रहे शामिल

इस अहम बैठक की सह-अध्यक्षता कतर के विदेश मंत्रालय के अरब मामलों के विभाग के निदेशक नायेफ अल एमादी और मिस्र के अरब मामलों के सहायक विदेश मंत्री इहाब फहमी ने की। दोनों अधिकारियों ने मिलकर यह तय किया कि आने वाली मुख्य बैठक में किन-किन मुद्दों पर मुहर लगानी है। अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच अब तक के द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति का जायजा लिया और गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को होने वाली मुख्य समिति की बैठक की सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया। इस मुख्य सत्र की अगुवाई कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी तथा मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती करेंगे।

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आर्थिक और निवेश समझौतों पर खास जोर

इस पूरी बातचीत के दौरान मुख्य रूप से आर्थिक, निवेश और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने पर सबसे ज्यादा बात की गई। दोनों पक्षों ने मिस्र के भूमध्यसागरीय तट पर चल रही 29.7 अरब डॉलर की 'आलम अल रौम' विकास परियोजना के पहले चरण की प्रगति की समीक्षा की। इस बड़े बुनियादी ढांचे की परियोजना को कतर की कंपनी कतर डियार द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट नवंबर 2025 में दोनों देशों के बीच हुए 7.5 अरब डॉलर के निवेश साझेदारी पैकेज का ही एक हिस्सा है, जिससे दोनों देशों के व्यापार को एक नई गति मिल रही है।

व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

बैठक के अंत में दोनों देशों के अधिकारियों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि अक्टूबर 2026 में एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए बातचीत के पहले दौर की शुरुआत की जाएगी। इस नए समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को और अधिक गहरा करना है, जिससे आने वाले समय में व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा पहुंचेगा।

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