कतर के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हमद बिन जासिम बिन जाबेर अल थानी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में चेतावनी दी है कि इस समुद्री रास्ते पर किसी भी तरह का एकतरफा नियंत्रण या इसे वसूली का जरिया बनाना खाड़ी देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सीधा खतरा है। शेख हमद ने साफ कहा कि इस रास्ते को लेकर होने वाली किसी भी बातचीत में खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC को शामिल करना बेहद जरूरी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या है पूर्व प्रधानमंत्री की मांग?

शेख हमद का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और इसे किसी भी शर्त के बिना हमेशा खुला रखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इस रास्ते को बातचीत या समझौतों के लिए सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता इसी बात पर टिकी है कि यह मार्ग सुरक्षित रहे। हाल के हफ्तों में ईरान द्वारा कुछ जहाजों से शुल्क वसूलने की खबरों और अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा से जुड़े ताजा हालात क्या हैं?

28 फरवरी से ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच विवाद बढ़ने के बाद से इस समुद्री रास्ते पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। कतर सरकार और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान ने पहले ही ईरान द्वारा कतर की सीमा पर किए गए हमलों को अस्वीकार्य बताया है। फिलहाल GCC देश इस कोशिश में जुटे हैं कि एक समिति बनाई जाए जो इस रास्ते के प्रबंधन को देखे ताकि व्यापार में कोई रुकावट न आए। इस पूरे मामले से जुड़े मुख्य घटनाक्रम नीचे दिए गए हैं:

तारीख प्रमुख घटनाक्रम
19 मार्च 2026 कतर ने ईरानी सैन्य अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया
24 मार्च 2026 पूर्व पीएम शेख हमद ने GCC को बातचीत में शामिल करने की मांग की
25 मार्च 2026 होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट जारी हुई
हालिया अपडेट पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच समुद्री सुरक्षा पर चर्चा हुई

इस तनाव का सीधा असर खाड़ी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और व्यापार पर भी पड़ सकता है क्योंकि यहीं से दुनिया का सबसे ज्यादा कच्चा तेल और गैस का कारोबार होता है। कतर का विदेश मंत्रालय लगातार अंतरराष्ट्रीय पक्षों के संपर्क में है ताकि ऊर्जा की सप्लाई में कोई बाधा न आए और खाड़ी देशों तक सामान की डिलीवरी सुरक्षित तरीके से होती रहे।