कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी को खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों के बीच होने वाले आखिरी समझौते की शर्तों को तय करने के लिए कतर ने खास तकनीकी और एक्सपर्ट ग्रुप बनाए हैं। ये ग्रुप अब समझौते की बारीकियों पर काम करेंगे ताकि दोनों देशों के बीच शांति कायम हो सके।

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कतर के प्रधानमंत्री के सलाहकार और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Dr. Majed bin Mohammed Al-Ansari ने 21 जून 2026 को इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ये ग्रुप ‘लेक लुसर्न समिट’ (Lake Lucerne Summit) का हिस्सा हैं। इनका मुख्य काम पहले से साइन हुए समझौते (MoU) की सभी बातों को अंतिम रूप देना और उन्हें लागू करने के लिए फॉलो-अप ग्रुप बनाना होगा।

समझौते (MoU) की मुख्य बातें

20 जून 2026 को एक 14 पॉइंट वाले MoU पर साइन हुए थे, जिसमें कई अहम शर्तें रखी गई हैं:

  • सैन्य ऑपरेशन तुरंत और हमेशा के लिए बंद होंगे, जिसमें लेबनान के हालात भी शामिल हैं।
  • आखिरी समझौते तक पहुँचने के लिए 60 दिन का समय तय किया गया है।
  • अमेरिका अपनी नेवल ब्लॉकेड और अन्य पाबंदियों को हटाना शुरू करेगा।
  • ईरान 60 दिनों तक Strait of Hormuz से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इन 60 दिनों के दौरान तकनीकी चर्चा होगी।
  • ईरान के फ्रीज किए गए 6 अरब डॉलर के फंड को रिलीज करने और प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार होगा।

इस पूरी प्रक्रिया में स्विट्जरलैंड के Bürgenstock Resort में तकनीकी बातचीत शुरू हो चुकी है। इसमें कतर और पाकिस्तान बीच-बचाव करने वाले देशों के तौर पर काम कर रहे हैं। इस बैठक में अमेरिका की ओर से JD Vance, Steve Witkoff और Jared Kushner शामिल हैं, जबकि ईरान की तरफ से Mohammad-Bagher Ghalibaf और Foreign Minister Abbas Araghchi जैसे बड़े अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस डील को परमाणु हथियारों के खिलाफ एक दीवार बताया है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा है कि लेबनान में युद्धविराम न होना बातचीत का एक बड़ा मुद्दा रहेगा। फिलहाल कतर, अमेरिका और ईरान के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक चल रही है, जिसमें लेबनान विवाद और ईरान के फंसे हुए पैसों को छोड़ने पर चर्चा हो रही है।