Qatar सरकार ने साफ़ कर दिया है कि समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आज़ादी सभी Gulf देशों का अधिकार है। Qatar के विदेश मंत्रालय ने कहा कि समुद्री रास्तों को बंद करना किसी भी कीमत पर मंज़ूर नहीं होगा। यह फैसला पूरे क्षेत्र की शांति और व्यापार के लिए बहुत ज़रूरी है।

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Qatar के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Majed al-Ansari ने कहा कि समुद्री रास्तों की आज़ादी एक गारंटीशुदा अधिकार है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि किसी भी समुद्री रास्ते को बंद करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि Strait of Hormuz जैसे अहम रास्तों का खुला रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाने-पीने की चीज़ों की सप्लाई के लिए ज़रूरी है।

Qatar के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammad bin Abdulrahman ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Aragchi से फोन पर बात करते हुए कहा कि समुद्री रास्तों की आज़ादी पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर Strait of Hormuz को बंद किया गया, तो इससे संकट और बढ़ जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला

Qatar ने अपने इस रुख के लिए 1982 के United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) का हवाला दिया है। Majed al-Ansari ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक, किसी भी देश को सुरक्षा के नाम पर भी Strait of Hormuz में जहाजों को रोकने का हक नहीं है।

  • GCC देशों का साथ: Bahrain, Kuwait, Saudi Arabia और UAE जैसे देश भी इसी बात पर सहमत हैं।
  • अमेरिकी सहयोग: अमेरिका और GCC देशों ने मिलकर मांग की है कि Strait of Hormuz को बिना किसी शर्त के खुला रखा जाए।
  • फीस का विरोध: Gulf देशों ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने के लिए किसी भी तरह के टैक्स या फीस लगाने का विरोध किया है।

Qatar के प्रतिनिधि Sheikha Alya Ahmed bin Saif Al-Thani ने UN सुरक्षा परिषद में भी यह बात रखी कि समुद्री सुरक्षा के लिए पूरी दुनिया का साथ मिलना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz को राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।