Jerusalem मुद्दे पर Qatar का बड़ा कदम, अम्मान में अरब देशों के साथ मिलकर बनाई नई रणनीति.

Praggya Singh sabal5 August 20262 min read61 viewsQatar
Jerusalem मुद्दे पर Qatar का बड़ा कदम, अम्मान में अरब देशों के साथ मिलकर बनाई नई रणनीति.

5 अगस्त 2026 को जॉर्डन की राजधानी अम्मान में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें Qatar समेत अरब और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अधिकृत यरूशलेम में Israeli नीतियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कार्रवाई करना था। इस चर्चा में क्षेत्र में बढ़ते तनाव और बस्तियों के विस्तार को लेकर गहरी चिंता जताई गई।

बैठक में क्या हुआ फैसला

जॉर्डन के विदेश मंत्री Ayman Safadi ने बैठक की मेजबानी की। इसमें Arab League के महासचिव Ahmed Aboul Gheit भी मौजूद थे। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यरूशलेम की अरब, इस्लामी और ईसाई पहचान को बदलने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी देशों ने साफ तौर पर कहा कि ऐसी कोई भी कार्रवाई जो यरूशलेम की कानूनी या जनसांख्यिकीय स्थिति को बदलने की कोशिश करती है, वह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और पूरी तरह से अवैध है।

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फिलिस्तीन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन

मिनिस्टर्स ने अपनी आधिकारिक घोषणा में दोहराया कि East Jerusalem पूरी तरह से अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र का हिस्सा है और इसे June 4, 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की राजधानी के रूप में देखा जाना चाहिए। बैठक में Al Aqsa Mosque और ईसाई धार्मिक स्थलों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की गई।

  • संयुक्त राजनयिक अभियान: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने के लिए एक साझा कूटनीतिक अभियान शुरू किया जाएगा।
  • सुरक्षा परिषद से अपील: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से तुरंत दखल देने और अवैध निर्माण रोकने की मांग की गई है।
  • ऐतिहासिक संरक्षकता: बैठक में यरूशलेम के धार्मिक स्थलों पर 'Hashemite Custodianship' का समर्थन किया गया।
  • गाजा शांति योजना: बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के कार्यान्वयन पर जोर दिया गया।

जॉर्डन के विदेश मंत्री Ayman Safadi ने आगाह किया कि यरूशलेम के धार्मिक स्थलों पर अभूतपूर्व खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने बताया कि जमीन हड़पने, संपत्ति जब्त करने और फिलिस्तीनियों पर आवाजाही के प्रतिबंधों के जरिए स्थिति को और गंभीर बनाया जा रहा है। चर्च ऑफ द होली सेपुलचर तक पहुंचने में आ रही बाधाओं और ईसाई संस्थानों पर बढ़ते दबाव को भी इस बैठक का एक मुख्य मुद्दा बनाया गया। इस आयोजन में Tunisia, Algeria, Iraq, Saudi Arabia, Somalia, Egypt, Morocco के अलावा Indonesia, Pakistan, Türkiye और Malaysia के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे, जो इस मुद्दे पर वैश्विक एकजुटता को दर्शाता है।

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